शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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महाराष्ट्र: आदिवासियों को मिलेगा वन भूमि का मालिकाना हक, सरकार का विशेष अभियान शुरू

महाराष्ट्र में उन हजारों आदिवासी किसानों के लिए एक बड़ी पहल की गई है, जो सालों से वन भूमि पर खेती तो कर रहे हैं, लेकिन उनके पास जमीन के कानूनी कागजात नहीं हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…

महाराष्ट्र: आदिवासियों को मिलेगा वन भूमि का मालिकाना हक, सरकार का विशेष अभियान शुरू
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र में उन हजारों आदिवासी किसानों के लिए एक बड़ी पहल की गई है, जो सालों से वन भूमि पर खेती तो कर रहे हैं, लेकिन उनके पास जमीन के कानूनी कागजात नहीं हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने ऐसे सभी किसानों को जमीन का पूरा मालिकाना हक देने के लिए एक समयबद्ध विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस कदम का मकसद उन आदिवासियों को कानूनी अधिकार दिलाना है, जिनके पास या तो जमीन के अधूरे कागजात हैं या वे पूरी तरह से इन अधिकारों से वंचित हैं।

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राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जानकारी दी कि यह विशेष अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन, यानी 17 सितंबर से शुरू होगा और 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती पर समाप्त होगा। उन्होंने बताया कि कई आदिवासी किसान बड़ी जमीन पर खेती करते हैं, लेकिन उनके पास असल में सिर्फ एक छोटे हिस्से, जैसे आधा या 1.1 एकड़, का ही मालिकाना हक होता है। यह अभियान ऐसे सभी लंबित दावों का निपटारा करेगा।

दावों के निपटारे की प्रक्रिया

इस अभियान को सफल बनाने के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है। सबसे पहले, ग्राम-स्तरीय वन अधिकार समितियां 17 से 19 सितंबर तक लगातार तीन दिन बैठकें करेंगी। इन बैठकों में उन सभी दावों की समीक्षा और मंजूरी दी जाएगी, जो बिना रिकॉर्ड वाली या आंशिक रूप से दर्ज वन भूमि से जुड़े हैं।

इसके बाद, 30 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच विशेष ग्राम सभाएं बुलाई जाएंगी, जहां ग्राम-स्तरीय समितियों द्वारा मंजूर किए गए दावों को आधिकारिक सामुदायिक स्वीकृति दी जाएगी। ग्राम सभा की मंजूरी के बाद इन प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी के लिए उप-विभागीय और जिला-स्तरीय वन अधिकार समितियों के पास भेजा जाएगा, जहां तय समय-सीमा के भीतर इन पर तेजी से कार्रवाई होगी।

प्रशासनिक तैयारी और निगरानी

मंत्री बावनकुले ने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र आदिवासी किसान को सिर्फ प्रशासनिक या तकनीकी गलतियों की वजह से उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा। अधिकार मिलने के बाद सभी पात्र किसानों को नए प्रॉपर्टी कार्ड, 7/12 एक्सट्रैक्ट और फॉर्म नंबर 12 जारी किए जाएंगे। जिनके पास पहले से अधिकार हैं, उन्हें फॉर्म 6 से 12 के एक्सट्रैक्ट मिलेंगे।

राजस्व और वन विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जाएगा ताकि नामों, सर्वे नंबरों और जमीन की माप का सटीक मिलान हो सके। जिला कलेक्टर व्यक्तिगत रूप से इस अभियान की निगरानी करेंगे, जबकि उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) नियमित समीक्षा करेंगे। तहसीलदार और फील्ड स्टाफ को दिए गए कार्यों को समय पर पूरा करने की सीधी जिम्मेदारी दी गई है।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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