विक्रम-1 की सफल उड़ान: भारत निजी रॉकेट लॉन्च करने वाला दुनिया का तीसरा देश बना
भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने देश के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की…
भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने देश के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कामयाबी के साथ ही भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया है, जहाँ कोई निजी कंपनी अंतरिक्ष की कक्षा में रॉकेट भेजने की क्षमता रखती है।
इस मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। 'विक्रम-1' की सफल उड़ान को भारत के तेजी से उभरते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी पुष्टि करते हुए लिखा, "विक्रम-1 ने श्रीहरिकोटा से सफल उड़ान भर ली है। भारत का पहला निजी तौर पर विकसित कक्षीय रॉकेट अब अंतरिक्ष की ओर बढ़ चुका है।"
नेताओं ने दी बधाई
इस महत्वपूर्ण मौके पर आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने 'एक्स' पर अपने एक पोस्ट में कहा, "यह उपलब्धि हमारे वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, नवाचार करने वालों और उद्यमियों की असाधारण क्षमता को दर्शाती है।" जगन मोहन रेड्डी ने इसे भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर बताते हुए उम्मीद जताई कि यह प्रयास देश में नवाचार और तकनीकी उत्कृष्टता का एक नया दौर शुरू करेगा।
क्या है विक्रम-1 की खासियत?
इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। 'विक्रम-1' एक चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान है, जिसे खास तौर पर छोटे उपग्रहों को तेजी से और जरूरत के हिसाब से पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। माना जा रहा है कि इस सफल मिशन से वैश्विक वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में भारत की दावेदारी और मजबूत होगी।
इनपुट: IANS



