जम्मू-कश्मीर: डोडा में चट्टानें गिरने से यात्री बस हादसे का शिकार, दो की मौत
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और चट्टानें खिसकने का खतरा एक बार फिर सामने आया है। डोडा जिले में सोमवार को एक यात्री बस और कई अन्य वाहन पहाड़ से गिरे पत्थरों की चपेट में आ गए, जिससे कम से…
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और चट्टानें खिसकने का खतरा एक बार फिर सामने आया है। डोडा जिले में सोमवार को एक यात्री बस और कई अन्य वाहन पहाड़ से गिरे पत्थरों की चपेट में आ गए, जिससे कम से कम दो लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना जिले के रग्गी नाला इलाके में हुई।
अधिकारियों ने बताया कि अचानक हुए भूस्खलन के कारण भारी पत्थर और मलबा सीधे हाईवे पर आ गिरा, जिसकी चपेट में वहां से गुजर रहे वाहन आ गए। हादसे के तुरंत बाद बचाव दलों को मौके पर भेजा गया और घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
यातायात रोका गया, एडवाइजरी जारी
इस घटना के बाद, क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन और पत्थरों के गिरने के खतरे को देखते हुए हाईवे पर यातायात तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। सड़क को साफ करने और यातायात बहाल करने का काम जारी है, लेकिन मौजूदा मौसम की स्थिति को देखते हुए इसमें समय लग सकता है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि जब तक मौसम में सुधार न हो और सड़क को सुरक्षित घोषित न कर दिया जाए, तब तक इस मार्ग पर अनावश्यक यात्रा करने से बचें।
खतरनाक पहाड़ी सड़कों का सच
जम्मू-कश्मीर के डोडा, किश्तवाड़, राजौरी और पुंछ जैसे पहाड़ी जिलों में इस तरह के हादसे अक्सर होते रहते हैं। इन इलाकों की सड़कें बेहद तीखी, घुमावदार और कई जगहों पर अंधी मोड़ों वाली हैं। भारी बारिश के साथ-साथ भूस्खलन, चट्टानों का खिसकना, सड़क का धंसना और ड्राइवरों द्वारा तेज गति या ओवरलोडिंग इन हादसों के मुख्य कारण हैं। ट्रैफिक विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगाम कसने के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं और स्थानीय प्रशासन भी खराब मौसम में जोखिम भरे रास्तों पर यात्रा न करने की सलाह देता रहता है।
इस क्षेत्र में हुए पिछले बड़े हादसे
इस क्षेत्र में हुए कुछ पिछले हादसों पर नजर डालें तो जनवरी में भद्रवाह-चंबा अंतर-राज्यीय सड़क पर सेना का एक ट्रक 200 फुट गहरी खाई में गिर गया था, जिसमें 10 सैनिकों की मौत हो गई थी। इसी तरह, जून में खेलानी सुरंग के पास मच्छैल यात्रा के तीन तीर्थयात्रियों की कार खाई में गिरने से मौत हो गई थी। वहीं, जुलाई 2025 में पोंडा के पास एक ओवरलोडेड टेम्पो ट्रैवलर के खाई में गिरने से सात यात्रियों की जान चली गई थी।
इनपुट: IANS



