मतदाता सूची विवाद: 'सामना' के जरिए शिवसेना (UBT) की चेतावनी, कहा- 'वोट छीनने पर विद्रोह होगा'
मुंबई में महा विकास अघाड़ी (MVA) के विरोध मार्च के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तीखी चेतावनी दी है। पार्टी ने मतदाता सूची से नाम…
मुंबई में महा विकास अघाड़ी (MVA) के विरोध मार्च के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तीखी चेतावनी दी है। पार्टी ने मतदाता सूची से नाम हटाने की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भाजपा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के जरिए महाराष्ट्र में 2 करोड़ समेत देशभर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के वोटिंग अधिकार मनमाने ढंग से छीन लिए गए हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने संपादकीय में भाजपा पर सत्ता के घमंड में चूर होने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि भाजपा सत्ता में बने रहने के लिए "भ्रष्ट चुनाव आयोग" पर भरोसा कर रही है। 'सामना' में लिखा गया, "यह सत्ता का घमंड है और भाजपा ज्ञानेश कुमार जैसों को ताकत देकर इस सत्ता का मजा ले रही है।"
भाजपा नेताओं की टिप्पणियों पर पलटवार
संपादकीय में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्री आशीष शेलार की हालिया टिप्पणियों की कड़ी निंदा की गई है। फडणवीस ने विपक्ष की रैली को 'राजनीतिक जमीन तलाशने की बेताब कोशिश' बताया था, जबकि शेलार ने इसे 'सस्ती राजनीति' और मांगों को 'चिल्लाना' कहा था। इस पर पलटवार करते हुए ठाकरे गुट ने इसे जनता और तिरंगे का अपमान करार दिया।
'सामना' ने चेतावनी देते हुए कहा, "जब 5 से 10 लाख लोग एक साथ दर्द से रोते हैं, तो यह इतना बड़ा बवाल खड़ा करता है कि जालिमराज को उखाड़ फेंका जा सके। उस 'रोने-धोने' से बगावत की जंगली आग भड़कती है।"
न्यायिक और प्रशासनिक आपत्तियों का हवाला
शिवसेना (यूबीटी) ने एसआईआर प्रक्रिया पर कानूनी और प्रशासनिक आपत्तियों को भी उजागर किया। लेख में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी का जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी नागरिक के वोट देने के अधिकार को छीनना "आत्मा को शरीर से अलग करने" जैसा है और यह संवैधानिक ढांचे का उल्लंघन है।
इसके अलावा, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह के बयान का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने इस प्रक्रिया को गैरकानूनी बताया था। आर.के. सिंह ने कहा था कि बिना सही जांच या सुनवाई के मतदाताओं को हटाना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 22 का सीधा उल्लंघन है।
संपादकीय में सवाल किया गया है, "अगर एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी और सुप्रीम कोर्ट के जज दोनों इस प्रक्रिया को मनमाना और गैरकानूनी कहते हैं, तो क्या भाजपा भी उनकी बातों को 'चीखना' कहेगी?"
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
मुंबई में हुए विरोध मार्च में प्रदर्शनकारियों ने तीन मुख्य मांगें उठाई थीं। इनमें एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रद्द करना, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को खत्म करना और चुनाव के लिए मतपत्र (बैलेट पेपर) प्रणाली को वापस लागू करना शामिल है।
इनपुट: IANS



