मंगलवार, 21 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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शरावती परियोजना: विरोध के बावजूद कर्नाटक सरकार पीछे नहीं हटेगी, डीके शिवकुमार ने किया ऐलान

कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह विरोध के बावजूद महत्वाकांक्षी 'शरावती पंप स्टोरेज परियोजना' को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस…

शरावती परियोजना: विरोध के बावजूद कर्नाटक सरकार पीछे नहीं हटेगी, डीके शिवकुमार ने किया ऐलान
(फोटो: IANS)

कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह विरोध के बावजूद महत्वाकांक्षी 'शरावती पंप स्टोरेज परियोजना' को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस परियोजना को राज्य की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि सरकार इसे हर हाल में सुनिश्चित करेगी।

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बेंगलुरु में कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केपीसीएल) के 57वें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए शिवकुमार ने कहा कि इस परियोजना की नींव बहुत पहले रखी गई थी, लेकिन यह साकार नहीं हो सकी थी। उन्होंने कहा, "अब इसे लागू करने के प्रयास जारी हैं और आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त की जा रही हैं। हालांकि कुछ लोग आपत्ति जता रहे हैं, लेकिन हम इस परियोजना से पीछे नहीं हटेंगे।"

सफलता के अन्य उदाहरण

उपमुख्यमंत्री ने येलाहांका में गैस-आधारित विद्युत संयंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी इसका काफी विरोध हुआ था, लेकिन राज्य के हित में उसे लागू किया गया और आज वह बिजली का उत्पादन कर रहा है। इसी तरह, उन्होंने पावागड़ा सोलर पार्क का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने पूरे देश के लिए एक मिसाल बताया। वहां किसानों से ज़मीन खरीदने के बजाय उन्हें परियोजना में भागीदार बनाया गया।

पावागड़ा पार्क का होगा विस्तार

डीके शिवकुमार ने बताया कि पावागड़ा सोलर पार्क वर्तमान में 2,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि क्षेत्र के किसान अब परियोजना के विस्तार के लिए 10,000 एकड़ ज़मीन देने के लिए आगे आए हैं और विस्तार का काम जल्द ही शुरू होगा।

मुफ्त बिजली योजनाओं पर सरकार का खर्च

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार 'गृह ज्योति योजना' के तहत 1.61 करोड़ परिवारों को मुफ्त बिजली दे रही है, जिस पर सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा, कृषि पंप सेटों को मुफ्त बिजली देने के लिए सालाना 20,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाती है। शिवकुमार ने कहा कि इन दोनों योजनाओं से राज्य के लोगों को करीब 30,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

इनपुट: IANS

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