टैस्माक भ्रष्टाचार मामला: अग्रिम ज़मानत खारिज होने के बाद DMK विधायक सेंथिल बालाजी पहुँचे सुप्रीम कोर्ट
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके विधायक वी. सेंथिल बालाजी ने मद्रास हाई कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला तमिलनाडु…
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके विधायक वी. सेंथिल बालाजी ने मद्रास हाई कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (टैस्माक) में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है, जिसमें हाई कोर्ट ने बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष बालाजी की याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। सीजेआई की बेंच ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी है, बशर्ते याचिका में मौजूद किसी भी कमी को दूर कर लिया जाए।
क्या हैं भ्रष्टाचार के आरोप?
यह मामला सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) द्वारा 28 जुलाई को बालाजी और कई अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज की गई एक FIR से संबंधित है। आरोप 2021 से 2025 के बीच उस अवधि के हैं, जब बालाजी राज्य के बिजली, निषेध और आबकारी मंत्री थे। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि बालाजी ने छह अन्य लोगों, निजी कंपनियों, ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टरों और टैस्माक के अज्ञात अधिकारियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची थी।
FIR में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराएँ लगाई गई हैं। इनमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, रिकॉर्ड में हेरफेर और सरकारी धन के गबन जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस साजिश के तहत आधिकारिक प्रक्रियाओं में हेरफेर करके सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुँचाया गया और अवैध धन की मनी लॉन्ड्रिंग भी की गई।
हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी याचिका?
गुरुवार को मद्रास हाई कोर्ट ने सेंथिल बालाजी को गिरफ्तारी-पूर्व जमानत देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस जीके इलांथिरैयन की एकल-न्यायाधीश बेंच ने कहा था कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मामला बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील पर भी गौर किया कि आरोपियों ने अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग कर राज्य को भारी वित्तीय नुकसान पहुँचाया है।
बालाजी का पक्ष
मद्रास हाई कोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत याचिका में सेंथिल बालाजी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। उन्होंने दलील दी थी कि FIR में अस्पष्ट और सामान्य आरोप हैं और इसमें किसी विशेष टेंडर, अनुबंध या लेन-देन का उल्लेख नहीं है जो उन्हें इन अपराधों से सीधे तौर पर जोड़ता हो। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और करूर भगदड़ विवाद के बाद सत्ताधारी दल की दुश्मनी के कारण इसे दर्ज किया गया है।
इनपुट: IANS



