मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक: 50 साल के सबसे भयंकर सूखे से जूझ रहा गडग, सरकार जल्द जारी करेगी दूसरी सूखा-ग्रस्त सूची

कर्नाटक के कई इलाके इस साल सूखे की गंभीर चपेट में हैं, खासकर गडग जिला, जिसे पिछले पांच दशकों का सबसे भयंकर सूखा झेलना पड़ रहा है। इस संकट के बीच, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को घोषणा की कि…

कर्नाटक: 50 साल के सबसे भयंकर सूखे से जूझ रहा गडग, सरकार जल्द जारी करेगी दूसरी सूखा-ग्रस्त सूची
(फोटो: IANS)

कर्नाटक के कई इलाके इस साल सूखे की गंभीर चपेट में हैं, खासकर गडग जिला, जिसे पिछले पांच दशकों का सबसे भयंकर सूखा झेलना पड़ रहा है। इस संकट के बीच, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को घोषणा की कि राज्य सरकार निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत विस्तृत मूल्यांकन के बाद जल्द ही सूखा-प्रभावित तालुकों की दूसरी सूची जारी करेगी। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उन्होंने यह जानकारी गडग में जिला-स्तरीय अधिकारियों के साथ सूखे की स्थिति की समीक्षा बैठक के बाद दी।

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मुख्यमंत्री ने कहा, "हमें गाइडलाइंस के मुताबिक सूखा-ग्रस्त इलाकों की घोषणा करनी होती है। इसी के अनुसार, हम एक स्टडी कर रहे हैं और जल्द ही दूसरी लिस्ट जारी करेंगे।" उन्होंने बताया कि जिले में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे किसानों की आजीविका खतरे में है और लोग परेशान हैं।

जमीनी हकीकत और केंद्र को रिपोर्ट

सीएम शिवकुमार ने बताया कि जिला प्रभारी मंत्रियों ने हर तालुक का दौरा कर जमीनी हकीकत पर रिपोर्ट सौंपी है और अधिकारी भी अपना आकलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "दोनों रिपोर्टों की जांच की जानी है और केंद्र को एक रिपोर्ट सौंपी जानी है।" यह महत्वपूर्ण है कि राज्य की रिपोर्ट केंद्र की टीम के आकलन से मेल खाए, क्योंकि तभी केंद्र सरकार से मदद मिलेगी।

गडग जिले के दौरे के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने हेलीकॉप्टर से यात्रा करते हुए स्थिति देखी। कई जगहों पर बुवाई बिल्कुल नहीं हुई है। जहां बुवाई हुई भी है, वहां भी किसानों को शायद 10 से 15 प्रतिशत ही फसल मिल पाए।" उन्होंने कपास, मूंगफली, मक्का और सूरजमुखी की फसलों का निरीक्षण कर किसानों से बात की और उनकी चिंताएं सुनीं।

पेयजल और राहत के लिए उठाए गए कदम

सूखे से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि हर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र को पीने के पानी के लिए 1 करोड़ रुपए दिए गए हैं। इसके अलावा, आपातकालीन जरूरतों के लिए डिप्टी कमिश्नरों के पास अतिरिक्त फंड भी रखा गया है।

फिलहाल, गडग जिले में केवल गजेंद्रगढ़ तालुक को ही सूखा-ग्रस्त घोषित किया गया है, जबकि सभी विधायकों ने पूरे जिले को सूखा-ग्रस्त घोषित करने की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा है।

'प्रजा सेवा आंदोलन' और योजनाओं का सत्यापन

प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से, शिवकुमार ने 5 सितंबर से 'प्रजा सेवा आंदोलन' शुरू करने की भी घोषणा की। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को अपनी शिकायतों के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। साथ ही, सरकार गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों का दोबारा सत्यापन कर रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाभ सही लोगों तक पहुंचे और इसका दुरुपयोग न हो।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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