रूस से डीजल आयात: राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी ही पार्टी के सीनेटरों की आलोचना को किया खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल आयात करने के अपने हालिया फैसले का पुरजोर बचाव किया है और इसका विरोध कर रहे अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटरों की आलोचना को "गंभीर नहीं" बताकर खारिज…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल आयात करने के अपने हालिया फैसले का पुरजोर बचाव किया है और इसका विरोध कर रहे अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटरों की आलोचना को "गंभीर नहीं" बताकर खारिज कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए डीजल पर कोई 'कैप' या प्रतिबंध भी लगा सकता है।
ट्रंप का यह फैसला और उनकी टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने खुद पिछले महीने एक कानून पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून के तहत 18 अक्टूबर से रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाया जा सकता है। ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुए समझौते को सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि "पूरी दुनिया के लिए" एक डील बताया। उन्होंने कहा, "अगर इससे हमारे किसानों और पशुपालकों को कोई फायदा पहुंचता है, तो मुझे यह पसंद है।"
रिपब्लिकन सांसदों का कड़ा विरोध
इस फैसले की आलोचना करने वाले रिपब्लिकन नेताओं में सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की (अलास्का), सुसान कॉलिन्स (मेन), थॉम टिलिस (नॉर्थ कैरोलिना) और जॉन कर्टिस (यूटा) शामिल हैं। उन्होंने कुछ डेमोक्रेटिक सीनेटरों के साथ मिलकर रविवार को एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें प्रशासन से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की गई थी।
सीनेटर मर्कोव्स्की ने उसी कानून का हवाला दिया जिस पर ट्रंप ने तीन हफ्ते पहले दस्तखत किए थे। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति को इन अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए, न कि रूस को डीजल निर्यात करके राजस्व कमाने और यूक्रेन में युद्ध जारी रखने की अनुमति देनी चाहिए।"
क्या है प्रतिबंध से जुड़ा कानून?
पब्लिक लॉ 119-111 राष्ट्रपति को रूसी मूल के कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक का अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, इसमें राष्ट्रीय हित का हवाला देकर छूट देने का प्रावधान भी है। इस कानून के तहत पहला शुल्क 18 अक्टूबर से प्रभावी हो सकता है, लेकिन प्रशासन ने यह साफ नहीं किया है कि 2022 से रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक भारत इस सूची में होगा या नहीं।
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन ने फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद बढ़ी ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत यह समझौता किया है। पिछले हफ्ते ही ट्रंप ने घोषणा की थी कि रूस तत्काल लगभग 3 लाख टन डीजल की आपूर्ति करेगा और कुल आपूर्ति करीब 50 लाख टन तक पहुंचेगी। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने भी शुक्रवार को एक जनरल लाइसेंस जारी कर रूसी डीजल से जुड़े लेनदेन को अधिकृत किया है।
इनपुट: IANS



