TMC बैंक खाते फ्रीज़ मामला: कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची तृणमूल कांग्रेस, सोमवार को सुनवाई
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी एक जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के फैसले को पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। समाचार एजेंसी…
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी एक जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के फैसले को पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले पर शीर्ष अदालत सोमवार, 5 अगस्त को सुनवाई करेगी। यह याचिका पार्टी और उसकी राज्यसभा सांसद डोला सेन की ओर से दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी सूची के अनुसार, जस्टिस एमएम सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ इस विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) पर सुनवाई करेगी। TMC ने यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के 20 जुलाई के उस आदेश के खिलाफ दायर की है, जिसमें पार्टी को तत्काल कोई राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के तीन HDFC बैंक खातों से जुड़ा है, जिन पर ED ने डेबिट (पैसे निकालने) पर रोक लगा दी थी। यह कार्रवाई 23 जून को बिधाननगर के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR के आधार पर की गई थी। पुलिस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इन खातों के जरिए प्रभाव का गलत इस्तेमाल, बेईमानी और संदिग्ध तरीकों से इकट्ठा किए गए अवैध धन का लेन-देन हुआ। इसी FIR के आधार पर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17(1-A) के तहत मामला दर्ज कर खातों को फ्रीज करने का आदेश जारी किया।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने क्यों नहीं दी थी राहत?
जस्टिस कृष्णा राव की एकल-न्यायाधीश पीठ ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि पहली नजर में अदालत को हस्तक्षेप करने जैसा कोई मामला नहीं दिखा। हाई कोर्ट ने पाया कि ED ने पार्टी के बैंक खातों का विश्लेषण किया था और केयरवेल ग्रुप समेत कई संस्थाओं को बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी। अदालत ने कहा, "इस चरण में यह तय करना संभव नहीं है कि ट्रांसफर कानूनी है या नहीं।"
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि ED ने सिर्फ छह खाते फ्रीज किए थे, जबकि पार्टी 164 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि वाले 36 अन्य खातों का संचालन कर रही थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने ED की उस शुरुआती आपत्ति को खारिज कर दिया था जिसमें याचिका की योग्यता पर सवाल उठाया गया था।
TMC और ED का पक्ष
ED के अनुसार, 164 करोड़ रुपये के कथित संदिग्ध लेन-देन का पता चलने के बाद यह कार्रवाई की गई। एजेंसी ने बताया कि उनकी कार्रवाई से पहले ही पश्चिम बंगाल पुलिस के कहने पर इन खातों से डेबिट पर रोक लगा दी गई थी।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह कार्रवाई मनमाने ढंग से की गई है और इसमें अपराध से जुड़ी किसी विशेष आय की पहचान नहीं की गई। पार्टी ने इसे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद उस पर दबाव बनाने के लिए उठाए गए कदमों की एक कड़ी बताया है।
इनपुट: IANS



