बुधवार, 19 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
देश

अपार ID: छात्रों के लिए 'ऑप्ट-आउट' का विकल्प देना होगा, सुप्रीम कोर्ट का CBSE को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के लिए बनाई जा रही अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) ID योजना पूरी तरह से स्वैच्छिक रहनी चाहिए। इस संबंध में, अदालत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा…

अपार ID: छात्रों के लिए 'ऑप्ट-आउट' का विकल्प देना होगा, सुप्रीम कोर्ट का CBSE को निर्देश
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के लिए बनाई जा रही अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) ID योजना पूरी तरह से स्वैच्छिक रहनी चाहिए। इस संबंध में, अदालत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देगी कि सहमति फॉर्म में छात्रों और अभिभावकों के लिए योजना से बाहर रहने यानी 'ऑप्ट-आउट' का एक स्पष्ट विकल्प मौजूद हो।

विज्ञापन

यह मामला चार छात्रों के अभिभावकों द्वारा दायर एक याचिका के बाद शीर्ष अदालत पहुंचा, जिसमें अपार ID योजना की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह CBSE को ओडिशा उच्च न्यायालय के एक पुराने फैसले को पूरे देश में लागू करने का निर्देश देगी।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ताओं ने CBSE के उस फैसले पर सवाल उठाया था जिसमें बोर्ड परीक्षाओं के पंजीकरण के लिए अपार ID को अनिवार्य कर दिया गया था। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने तर्क दिया कि यह योजना आधार से जुड़ी है, जिससे छात्रों पर आधार बनवाने का अप्रत्यक्ष दबाव बनता है। उन्होंने दलील दी कि शिक्षा के संवैधानिक अधिकार के लिए आधार या अपार को शर्त नहीं बनाया जा सकता।

याचिका में छात्रों के निजी डेटा को एकत्र करने और स्टोर करने को लेकर भी चिंता जताई गई। इसमें कहा गया कि यह योजना छात्रों की लंबी अवधि तक ट्रैकिंग और प्रोफाइलिंग को संभव बनाती है, जो निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। याचिका के मुताबिक, यह योजना सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'के.एस. पुट्टास्वामी निजता निर्णय' के सिद्धांतों के भी खिलाफ है।

अदालत का रुख और निर्देश

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने पाया कि ओडिशा उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2023 में ही इस मुद्दे पर एक फैसला दिया था, जिसे CBSE ने चुनौती नहीं दी। उस फैसले में उच्च न्यायालय ने माना था कि सहमति फॉर्म की भाषा स्पष्ट नहीं थी और इसमें योजना से बाहर रहने का सीधा विकल्प नहीं दिया गया था, जिससे इसकी स्वैच्छिक प्रकृति कमजोर होती है।

इसी आधार पर, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह CBSE को निर्देश जारी करेगा। समाचार एजेंसी के हवाले से, पीठ ने कहा, "हम सीबीएसई को निर्देश देंगे कि वह इस फैसले को पूरे देश में लागू करे... हम सीबीएसई को इन मुद्दों की जांच करने का भी निर्देश दे रहे हैं।" अदालत ने यह भी साफ किया कि CBSE के सभी सर्कुलर डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के अधीन होंगे।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →