वीर सावरकर पर टिप्पणी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर पर उनकी एक टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शीर्ष अदालत ने…
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर पर उनकी एक टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को उनके खिलाफ चल रही निचली अदालत की कार्यवाही को यह पाते हुए रद्द कर दिया कि मुकदमा चलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया में खामी थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में राहुल गांधी पर मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी। इसी प्रक्रियात्मक कमी के आधार पर अदालत ने कांग्रेस नेता के खिलाफ जारी किए गए समन और पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने का आदेश दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद 2022 में राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान महाराष्ट्र में दिए गए एक बयान से शुरू हुआ था। उस समय उन्होंने वीर सावरकर को 'अंग्रेजों का नौकर' कहा था और यह भी दावा किया था कि सावरकर 'अंग्रेजों से पेंशन लेते थे।'
इन टिप्पणियों के खिलाफ वकील नृपेंद्र पांडे ने निचली अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। पांडे ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की टिप्पणियां भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए (दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत आती हैं, क्योंकि ये समाज में नफरत फैलाने के इरादे से की गई थीं। अपनी शिकायत में उन्होंने यह भी कहा था कि महात्मा गांधी ने सावरकर को देशभक्त माना था।
अदालती प्रक्रिया का सफर
इस मामले में अदालती सफर काफी लंबा रहा। जून 2023 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पांडे की शिकायत खारिज कर दी थी, जिसे उन्होंने सेशंस कोर्ट में चुनौती दी। सेशंस कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले को वापस मजिस्ट्रेट कोर्ट भेज दिया। इसके बाद, दिसंबर 2024 में निचली अदालत ने प्रथम दृष्टया आईपीसी की धाराओं के तहत मामला मानते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया।
इस समन के खिलाफ गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन 4 अप्रैल 2025 को उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जहां अब उन्हें राहत मिली है।
इनपुट: IANS



