दिल्ली: बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक, 15 जुलाई को अगली सुनवाई
दिल्ली की निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के ऑडिट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शुक्रवार को दिए अपने अं
दिल्ली की निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के ऑडिट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शुक्रवार को दिए अपने अंतरिम आदेश में अदालत ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा प्रस्तावित ऑडिट और स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति, दोनों ही प्रक्रियाओं पर रोक लगा दी है।
यह मामला दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) द्वारा बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) के फैसलों के खिलाफ दायर याचिकाओं से संबंधित है। न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए कहा कि यह विवाद एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल से जुड़ा है, जिस पर विचार करना आवश्यक है।
ऑडिट कौन करेगा, इस पर है विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद इस सवाल पर केंद्रित है कि डिस्कॉम का ऑडिट कौन करेगा। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2025 के एक पुराने फैसले से निकला है, जिसमें अदालत ने बिजली वितरण कंपनियों द्वारा जमा की गई 'नियामकीय परिसंपत्तियों' (Regulatory Assets) पर चिंता जताई थी। तब अदालत ने बिजली नियामक आयोगों को यह जांचने का निर्देश दिया था कि ये संपत्तियां किन परिस्थितियों में जमा हुईं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया था कि यह ऑडिट कौन करेगा।
इसके बाद, मार्च 2026 में दिल्ली के उपराज्यपाल ने CAG से ऑडिट कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस फैसले को APTEL में चुनौती दी गई, जिसने कहा कि DERC कानूनी रूप से CAG को यह काम नहीं सौंप सकता। APTEL ने इसके बजाय DERC को एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया था। DERC ने इसी आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान DERC की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि उपभोक्ताओं से किसी भी तरह की वसूली से पहले सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के तहत ऑडिट पूरा होना जरूरी है। वहीं, बिजली कंपनियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ऑडिट और नियामकीय परिसंपत्तियों की वसूली दो अलग-अलग मुद्दे हैं और मौजूदा विवाद सिर्फ यह है कि ऑडिट कौन करेगा।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि उसके अगस्त 2025 के फैसले की व्याख्या की आवश्यकता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय की है और इसे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पास भेजने का निर्देश दिया है ताकि इसे सुनवाई के लिए एक उचित पीठ को सौंपा जा सके।
इनपुट: IANS



