रुपये की कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान: बाज़ार जिसे कमज़ोर समझ रहा, वह शायद 'अंडरवैल्यूड' है
भारतीय रुपये को लेकर बाजार में चल रही कमजोरी की आशंकाओं के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बुधवार को मुंबई में…
भारतीय रुपये को लेकर बाजार में चल रही कमजोरी की आशंकाओं के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बुधवार को मुंबई में उन्होंने कहा कि कई संकेतक इस ओर इशारा करते हैं कि भारतीय रुपया असल में ओवरवैल्यूड (अत्यधिक मूल्यांकित) नहीं, बल्कि अंडरवैल्यूड (कम मूल्यांकित) हो सकता है।
यह बयान उस मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद आया, जिसमें RBI ने रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विश्लेषक भारत की मजबूत पूंजी आकर्षित करने की क्षमता के बावजूद हेजिंग पैटर्न के आधार पर रुपये पर दबाव बने रहने का अनुमान लगा रहे थे।
बाजार और रुपये का वास्तविक मूल्य
मौद्रिक नीति के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर मल्होत्रा ने समझाया कि वित्तीय बाजार कम समय में हमेशा तर्कसंगत व्यवहार नहीं करते। उन्होंने कहा, "बाजार की धारणा और मुद्रा के बारे में निवेशकों की स्थिति हमेशा किसी मुद्रा के वास्तविक मूल्य को नहीं दर्शाती।"
उन्होंने मुद्रा मूल्यांकन के मानकों का जिक्र करते हुए कहा, "कई अनुमानों के अनुसार, जिनमें रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (आरईईआर) भी शामिल है, रुपया ओवरवैल्यूड नहीं है, बल्कि संभव है कि यह अंडरवैल्यूड हो।" मल्होत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि बाजार लंबी अवधि में ही किसी मुद्रा का सही मूल्य तय कर पाते हैं।
नीतिगत दरों में बदलाव का क्रम
बुधवार को रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी से पहले, केंद्रीय बैंक ने लगातार चार बैठकों—अगस्त 2026, जून 2026, अप्रैल 2026 और फरवरी 2026—में दरों और नीतिगत रुख को अपरिवर्तित रखा था। इससे पहले दिसंबर 2025 में आरबीआई ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत किया था।
वित्तीय क्षेत्र के लिए अन्य घोषणाएं
इस बैठक में आरबीआई ने कुछ अन्य महत्वपूर्ण कदमों का भी ऐलान किया।
- अकाउंट एग्रीगेटर (AA) सिस्टम: नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी अकाउंट एग्रीगेटर (NBFC-AA) प्रणाली में इंटरऑपरेबिलिटी लागू की जाएगी। इससे किसी भी लाइसेंस प्राप्त ऐप पर पंजीकृत ग्राहक अपना वित्तीय डेटा नेटवर्क पर मौजूद किसी भी वित्तीय संस्था के साथ साझा कर सकेगा। इससे डीमैट खाताधारकों को अपनी होल्डिंग्स और बैंक जमा की जानकारी एक ही जगह कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) में देखने में आसानी होगी। यह व्यवस्था 31 दिसंबर तक लागू करने की योजना है।
- तकनीकी सलाहकार समिति: वित्तीय बाजारों के लिए एक 'टेक्निकल कंसल्टेटिव कमेटी' का गठन किया जाएगा। यह समिति मुद्रा, सरकारी प्रतिभूति और विदेशी मुद्रा बाजारों से जुड़े नीतिगत विषयों पर बाजार सहभागियों के साथ संवाद का एक मंच प्रदान करेगी।
आरबीआई के अनुसार, भारत के अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम ने वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 3.82 लाख करोड़ रुपये के ऋण वितरण में मदद की। इस दौरान 3.68 करोड़ ऋण वितरित हुए, जो मूल्य के हिसाब से देश के खुदरा और MSME ऋण बाजार का 8.4% और संख्या के हिसाब से 11.8% था।
इनपुट: IANS



