भारत में क्विक कॉमर्स की रॉकेट-स्पीड: अगले 7 साल में 7 गुना बढ़कर $90 अरब का होगा बाज़ार
भारत में तेज़ और सुविधाजनक डिलीवरी का चलन बन चुका क्विक कॉमर्स यानी Q-कॉमर्स सेक्टर अभूतपूर्व रफ़्तार से बढ़ने के लिए तैयार है। गूगल और रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार…
भारत में तेज़ और सुविधाजनक डिलीवरी का चलन बन चुका क्विक कॉमर्स यानी Q-कॉमर्स सेक्टर अभूतपूर्व रफ़्तार से बढ़ने के लिए तैयार है। गूगल और रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2031 तक यह बाज़ार लगभग सात गुना बढ़कर 90 अरब डॉलर के विशाल आकार तक पहुँच सकता है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में इस बाज़ार का आकार करीब 13 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि आने वाले वर्षों में क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या में भारी इज़ाफ़ा होगा। अनुमान है कि 2031 तक देशभर में हर महीने इन प्लेटफॉर्म्स से खरीदारी करने वाले यूज़र्स की संख्या 10 करोड़ के पार चली जाएगी। इस त्योहारी सीजन में भी इस सेक्टर की चमक बरकरार रहने की उम्मीद है, जहाँ बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 110% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। यह कुल ऑनलाइन त्योहारी खर्च का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा होगा।
मेट्रो शहरों में गहरी होगी पैठ
इस तेज़ वृद्धि का बड़ा हिस्सा मेट्रो शहरों से आएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2031 तक क्विक कॉमर्स की कुल अतिरिक्त वृद्धि में मेट्रो शहरों की हिस्सेदारी करीब 60% होगी। इन शहरों में क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या भी मौजूदा 2.8 करोड़ से लगभग दोगुनी होकर 5 करोड़ तक पहुँचने की संभावना है। वर्तमान में मेट्रो शहरों के कुल रिटेल खर्च में क्विक कॉमर्स का हिस्सा लगभग 6% है, जो बढ़कर 20-23% तक जा सकता है।
अब किराना और नियमित खरीदारी पर ज़ोर
शुरुआती सफलता के बाद अब क्विक कॉमर्स कंपनियाँ अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आगे बढ़ने के लिए प्लेटफॉर्म्स और ब्रांड्स को सिर्फ़ ज़रूरत के समय छोटे-मोटे सामान (टॉप-अप ऑर्डर) की डिलीवरी से आगे बढ़ना होगा। उन्हें ग्राहकों को घर का पूरा मासिक राशन और अन्य ज़रूरी सामान मंगाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इसके लिए स्टॉक की ताज़गी, सप्लाई चेन में पारदर्शिता, बड़े पैक की उपलब्धता और बेहतर कीमत वाली पैकिंग जैसी रणनीतियाँ अपनानी होंगी।
गूगल इंडिया में क्विक कॉमर्स और फूडटेक के इंडस्ट्री हेड, करण दुगल ने कहा, "भारत में क्विक कॉमर्स अब एक ही तरह के बिजनेस मॉडल तक सीमित नहीं है। मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों में खरीदारी के व्यवहार में तेजी से बदलाव आ रहा है और इसमें रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं से लेकर महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स तक शामिल हैं।" उन्होंने आगे कहा कि जो ब्रांड ग्राहकों की इन बारीकियों को समझेंगे, वही इस विशाल बाज़ार में सफल होंगे। दुगल के अनुसार, गूगल नए ग्राहकों से भरोसा बनाने और पुराने ग्राहकों को बनाए रखने में ब्रांड्स की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इनपुट: IANS



