शनिवार, 22 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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वामपंथी आतंकवाद को अमेरिका ने बताया 'गंभीर खतरा', भारत समेत 67 देशों से सहयोग का आग्रह

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कट्टर वामपंथी राजनीतिक आतंकवाद को एक उभरता हुआ अंतरराष्ट्रीय खतरा बताते हुए दुनिया के देशों से इसके खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपो

वामपंथी आतंकवाद को अमेरिका ने बताया 'गंभीर खतरा', भारत समेत 67 देशों से सहयोग का आग्रह
(फोटो: IANS)

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कट्टर वामपंथी राजनीतिक आतंकवाद को एक उभरता हुआ अंतरराष्ट्रीय खतरा बताते हुए दुनिया के देशों से इसके खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर वॉशिंगटन में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में भारत सहित 67 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

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बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले दो दशकों में सरकारों ने कट्टर इस्लामी आतंकवाद के खतरे को काफी हद तक कमजोर कर दिया है, लेकिन राजनीतिक हिंसा के मामले में वामपंथी उग्रवाद पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने इसे आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक 'ब्लाइंड स्पॉट' (अंधा स्थान) बताया।

आतंकवाद पर बदली रणनीति की जरूरत

अमेरिकी विदेश विभाग में आयोजित इस बैठक को संबोधित करते हुए रुबियो ने कहा, "काफी लंबे समय तक हमारी आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक बड़ी कमी रही है। राजनीतिक वामपंथ से जुड़े उग्रवादी हिंसा के खतरे को लेकर हमारी सोच में एक ब्लाइंड स्पॉट रहा है।" उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज भी कई लोग इसे एक गंभीर खतरा मानने से इनकार करते हैं।

रुबियो ने 9/11 के हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सफलता का जिक्र किया, जिसके कारण ISIS जैसे संगठनों को कमजोर किया जा सका। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकारें अपनी रणनीति में बदलाव करें और कट्टर वामपंथी राजनीतिक हिंसा में शामिल संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों से निपटें।

अमेरिकी प्रशासन के कदम और भविष्य की योजना

मार्को रुबियो ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एंटीफा से जुड़े आतंकी नेटवर्क की जांच के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विदेश विभाग ने चार हिंसक वामपंथी उग्रवादी संगठनों को विदेशी आतंकवादी संगठन भी घोषित किया है। रुबियो ने जोर देकर कहा, "हम एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय खतरे का सामना कर रहे हैं... खुफिया जानकारी और सूचनाओं के आदान-प्रदान, कानून प्रवर्तन एजेंसियों की साझा रणनीति और आर्थिक कार्रवाई के जरिए हम इन नेटवर्कों को एक-एक करके खत्म करेंगे।"

इस बैठक में व्हाइट हाउस के उप प्रमुख स्टाफ स्टीफन मिलर और अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट भी मौजूद थे। बेसेंट ने कहा कि उनका विभाग आतंकवादी फंडिंग नेटवर्क को रोकने के लिए प्रतिबंधों का उपयोग जारी रखेगा।

भारत-अमेरिका सहयोग का महत्व

इस मंत्री-स्तरीय बैठक में भारत की भागीदारी आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों के मजबूत होते सहयोग को दर्शाती है। 2001 के बाद से भारत और अमेरिका ने खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा संबंधों को लगातार मजबूत किया है। इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया, जापान, इजरायल, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी समेत यूरोप व लैटिन अमेरिका के कई अन्य देश भी शामिल हुए।

इनपुट: IANS

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