रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बिहार: मंत्री की जनसुनवाई में फोन पर मांगी रिश्वत, रंगे हाथों पकड़े जाने पर कर्मचारी सस्पेंड

बिहार में एक सरकारी कर्मचारी को मंत्री की जनसुनवाई के दौरान कथित तौर पर रिश्वत मांगना भारी पड़ गया। सीतामढ़ी के एक डेटा एंट्री ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जब उसने एक आवेदक से फोन…

बिहार: मंत्री की जनसुनवाई में फोन पर मांगी रिश्वत, रंगे हाथों पकड़े जाने पर कर्मचारी सस्पेंड
(फोटो: IANS)

बिहार में एक सरकारी कर्मचारी को मंत्री की जनसुनवाई के दौरान कथित तौर पर रिश्वत मांगना भारी पड़ गया। सीतामढ़ी के एक डेटा एंट्री ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जब उसने एक आवेदक से फोन पर 50,000 रुपये की मांग की और यह पूरी बातचीत मंत्री के सामने स्पीकर पर चल रही थी।

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यह मामला शनिवार को राज्य के अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन उर्फ लखेंद्र पासवान की जनसुनवाई के दौरान सामने आया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सीतामढ़ी के रहने वाले कमलेश पासवान ने मंत्री से शिकायत की कि उनसे अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के तहत मिलने वाली अनुदान राशि को जारी करने के बदले रिश्वत मांगी जा रही है।

मंत्री के आदेश पर लगाया फोन

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मंत्री लखेंद्र पासवान ने कमलेश से तुरंत संबंधित कर्मचारी को फोन लगाने को कहा। जब कमलेश ने मंत्री की मौजूदगी में फोन लगाया, तो दूसरी तरफ से डेटा एंट्री ऑपरेटर ने कथित तौर पर 50,000 रुपये की अपनी मांग दोहरा दी। यह सुनकर वहां मौजूद सभी अधिकारी और लोग हैरान रह गए।

इसके बाद मंत्री ने फौरन सीतामढ़ी के जिला कल्याण अधिकारी (DWO) से संपर्क साधा। अधिकारी ने आरोपी कर्मचारी की पहचान चंदन कुमार के रूप में की, जो विभाग में डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

मंत्री ने DWO को चंदन कुमार को तत्काल निलंबित करने और उसके खिलाफ उचित विभागीय और कानूनी कार्रवाई शुरू करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर एक घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो संबंधित अधिकारी पर भी गाज गिरेगी।

लखेंद्र पासवान ने कहा कि बिहार सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है और किसी भी कीमत पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शिकायतकर्ता कमलेश पासवान को भरोसा दिलाया कि उनकी अर्जी की निष्पक्ष जांच होगी और अगर वह अनुदान के पात्र पाए जाते हैं, तो राशि बिना किसी देरी के जारी कर दी जाएगी। विभाग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिहार डेस्क

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