वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम: सीमा पर बसे 2600 से ज़्यादा गाँवों की तस्वीर बदलने की सरकारी पहल
देश के सीमावर्ती गाँवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें 'आखिरी' नहीं, बल्कि 'पहला गाँव' बनाने की सोच के साथ केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट…
देश के सीमावर्ती गाँवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें 'आखिरी' नहीं, बल्कि 'पहला गाँव' बनाने की सोच के साथ केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम' (VVP) के तहत 11,639 करोड़ रुपए खर्च कर 2,616 से अधिक सीमावर्ती गाँवों में बुनियादी ढाँचे और रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दशकों से विकास की दौड़ में पिछड़े इन इलाकों में पलायन को रोकना और वहाँ के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। सरकार का मानना है कि ये गाँव न केवल देश के प्रहरी हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण स्तंभ भी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यहाँ सड़क, बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी आधुनिक सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं।
क्यों पड़ी इस योजना की ज़रूरत?
भारत की स्थलीय सीमा 15,000 किलोमीटर से भी ज़्यादा लंबी है, जो सात देशों से लगती है। इनमें बांग्लादेश (4,096.7 किमी), चीन (3,488 किमी) और पाकिस्तान (3,323 किमी) के साथ सबसे लंबी सीमाएँ हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संपर्क और कमजोर बुनियादी ढाँचे के कारण इन सीमावर्ती क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग बेहतर अवसरों की तलाश में पलायन कर गए, जिससे कई गाँव खाली होने लगे। इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने 2023 में इस कार्यक्रम की शुरुआत की।
दो चरणों में हो रहा है काम
इस योजना को दो चरणों, VVP-1 और VVP-2, में लागू किया जा रहा है। VVP-1 एक केंद्र-प्रायोजित योजना है, जो मुख्य रूप से उत्तरी सीमा के गाँवों पर केंद्रित है और इसे राज्यों के सहयोग से चलाया जा रहा है। वहीं, VVP-2 एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठा रही है और इसके तहत अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे गाँवों को शामिल किया गया है।
दोनों चरणों का साझा लक्ष्य सीमावर्ती समुदायों की आत्मनिर्भरता बढ़ाना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। गौरतलब है कि VVP-1 की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में की गई थी और इसका औपचारिक शुभारंभ 10 अप्रैल, 2023 को अरुणाचल प्रदेश के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गाँव किबिथू से हुआ था।
इनपुट: IANS



