रविवार, 16 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश: 'ग्रीन' शिपयार्ड में हादसों की झड़ी, प्रमाणन और हकीकत में भारी अंतर

बांग्लादेश के शिप-ब्रेकिंग यार्ड में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भले ही देश के 31 में से 23 शिपयार्ड को 'ग्रीन' यानी पर्यावरण के अनुकूल होने का प्रमाण पत्र मिल चुका हो…

बांग्लादेश: 'ग्रीन' शिपयार्ड में हादसों की झड़ी, प्रमाणन और हकीकत में भारी अंतर
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश के शिप-ब्रेकिंग यार्ड में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भले ही देश के 31 में से 23 शिपयार्ड को 'ग्रीन' यानी पर्यावरण के अनुकूल होने का प्रमाण पत्र मिल चुका हो, लेकिन समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन जगहों पर जानलेवा हादसे लगातार हो रहे हैं। यह स्थिति प्रमाणन और ज़मीनी हकीकत के बीच एक बड़े अंतर को उजागर करती है।

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हालिया मामला 14 अगस्त का है, जब सीताकुंडा के भाटियारी स्थित 'फिरदौस स्टील शिप रीसाइक्लिंग इंडस्ट्रीज' में एक पुराने जहाज के अंदर ज़हरीली गैस की चपेट में आने से नौ मजदूरों की मौत हो गई। विस्फोटक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह घटना जहाज के एक बंद टैंक में हाइड्रोजन सल्फाइड गैस जमा होने के कारण हुई। यह जहाज, एमटी रासी, एक पुराना एलएनजी कैरियर था जो जुलाई 2025 में चट्टोग्राम पहुंचा था।

लगातार हो रहे हादसे

इस अकेली घटना के अलावा, आंकड़े भी एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर स्टडीज (बीआईएलएस) के अनुसार, 26 जून, 2025 से 14 अगस्त, 2026 के बीच इन शिपयार्ड में कुल 84 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 15 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 81 अन्य मजदूर घायल हुए।

विश्लेषण से पता चलता है कि ज्यादातर दुर्घटनाएं भारी वस्तुओं या गर्डर के गिरने, क्रेन या तारों के टूटने और गैस विस्फोट जैसी वजहों से होती हैं। इन घटनाओं ने उन आलोचनाओं को फिर से बल दिया है कि शिपयार्ड को दिए गए 'ग्रीन लाइसेंस' सिर्फ 'ग्रीनवाशिंग' का एक तरीका है, जिसका मकसद पर्यावरण के अनुकूल होने का भ्रामक दावा करना है।

क्या है हांगकांग कन्वेंशन?

जहाजों को सुरक्षित तरीके से तोड़ने के लिए मई 2009 में 'हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन' को अपनाया गया था, जो 26 जून, 2025 से लागू हुआ। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जहाजों की रीसाइक्लिंग से इंसानी सेहत, मजदूरों की सुरक्षा या पर्यावरण को कोई खतरा न हो। हालांकि, बांग्लादेश एनवायरनमेंटल लॉयर्स एसोसिएशन (बीईएलए) जैसे विशेषज्ञ समूहों का तर्क है कि यह कन्वेंशन पर्याप्त नहीं है और इन शिपयार्ड को और भी कड़े 'बेसल कन्वेंशन' का पालन करना चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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