मंगलवार, 11 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान: कट्टरपंथियों के अभियान के बाद अहमदिया समुदाय के अफसर का तबादला, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक सरकारी अधिकारी को उनकी धार्मिक पहचान के कारण पद से हटाए जाने का मामला सामने आया है, जिसकी मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…

पाकिस्तान: कट्टरपंथियों के अभियान के बाद अहमदिया समुदाय के अफसर का तबादला, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक सरकारी अधिकारी को उनकी धार्मिक पहचान के कारण पद से हटाए जाने का मामला सामने आया है, जिसकी मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अल्पसंख्यक अहमदिया मुस्लिम समुदाय से आने वाले नगमान अहमद को कट्टरपंथी समूहों के दबाव के बाद उनके पद से स्थानांतरित कर दिया गया।

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यह घटना पंजाब के चिनियट जिले के लालियान इलाके की है, जहाँ पंजाब लैंड रिकॉर्ड्स अथॉरिटी (PLRA) ने नगमान अहमद को असिस्टेंट डायरेक्टर लैंड रिकॉर्ड्स (ADLR) के पद पर नियुक्त किया था। लेकिन उनकी नियुक्ति के बाद ही कट्टरपंथी संगठन 'खत्म-ए-नबुव्वत' से जुड़े लोगों ने उनके खिलाफ एक अभियान छेड़ दिया। अभियान के दौरान उन्हें बार-बार 'कादियानी' कहकर संबोधित किया गया, जो अहमदिया समुदाय के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द है, और उन्हें पद से हटाने की मांग की गई।

कट्टरपंथियों के दबाव में प्रशासन का फैसला

विरोध और दबाव के कुछ ही दिनों बाद, 8 अगस्त को अधिकारियों ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया। इस आदेश में नगमान अहमद को तत्काल प्रभाव से PLRA मुख्यालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया। ब्रिटेन स्थित इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमेटी (IHRC) ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

IHRC के अनुसार, उसी आदेश में एक अन्य अधिकारी को लालियान में असिस्टेंट डायरेक्टर लैंड रिकॉर्ड्स का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। संगठन ने कहा, "उसमें यह नहीं बताया गया कि अहमद को हेडक्वार्टर में रिपोर्ट करने का निर्देश क्यों दिया गया। हालांकि, ये जरूर कहा कि यह फैसला उन्हें हटाने की मांग को लेकर उठे अभियान के बाद लिया गया। इस ट्रांसफर को उनके खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे लोगों ने इसे अपनी कोशिशों का नतीजा बताया और जश्न मनाया।"

भविष्य के लिए एक खतरनाक मिसाल

मानवाधिकार संगठन ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि यह घटना एक खतरनाक मिसाल कायम करती है। IHRC ने कहा, "अगर सरकारी अधिकारियों को इसलिए टारगेट किया जा सकता है और उनके पदों से हटाया जा सकता है क्योंकि कट्टरपंथियों को उनकी धार्मिक पहचान पर ऐतराज है, तो इसका असर भविष्य में और ज्यादा देखने को मिल सकता है।"

संगठन ने पंजाब के अधिकारियों से इस मामले पर तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संस्थाओं से अपील की है कि वे पाकिस्तान में अहमदिया लोगों के बिगड़ते हालात पर नजर रखें और पाकिस्तान सरकार पर अपने नागरिकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए दबाव डालें।

इनपुट: IANS

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