मंगलवार, 11 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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जहाज रीसाइक्लिंग में भारत दुनिया का नया सरताज, तय लक्ष्य से 5 साल पहले ही हासिल की नंबर 1 की कुर्सी

भारत ने समुद्री क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जहाज रीसाइक्लिंग में दुनिया का नंबर एक देश बनने का अपना लक्ष्य समय से पाँच साल पहले ही पूरा कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…

जहाज रीसाइक्लिंग में भारत दुनिया का नया सरताज, तय लक्ष्य से 5 साल पहले ही हासिल की नंबर 1 की कुर्सी
(फोटो: IANS)

भारत ने समुद्री क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जहाज रीसाइक्लिंग में दुनिया का नंबर एक देश बनने का अपना लक्ष्य समय से पाँच साल पहले ही पूरा कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'मैरीटाइम इंडिया विज़न (एमआईवी) 2030' के तहत यह लक्ष्य 2030 के लिए रखा गया था, लेकिन भारत ने 2025 में ही यह मुकाम पा लिया है।

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मंगलवार को जारी सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, वैश्विक जहाज रीसाइक्लिंग बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 35.4% हो गई है। यह आँकड़ा व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) की ताजा रिपोर्ट पर आधारित है। पिछले साल यानी 2024 में यह हिस्सेदारी 30.1% थी, जो एक साल के भीतर हुई महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। मात्रा के हिसाब से देखें तो 2024 में 1.86 मिलियन सकल टन (जीटी) के मुकाबले 2025 में यह बढ़कर 2.99 मिलियन जीटी हो गया, जो लगभग 60% की वृद्धि है।

अलंग: भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता का केंद्र

भारत की इस सफलता के पीछे गुजरात के अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग क्लस्टर की अहम भूमिका है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा जहाज रीसाइक्लिंग हब माना जाता है। देश की कुल रीसाइक्लिंग गतिविधियों का लगभग 98% हिस्सा यहीं से आता है। इस क्लस्टर की वार्षिक क्षमता करीब 6 मिलियन जीटी है और यह हर साल लगभग 3.50 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) स्टील का उत्पादन करता है, वह भी बिना किसी प्राकृतिक संसाधन का दोहन किए।

भविष्य की योजना और विस्तार

सरकार की योजना भारत की जहाज रीसाइक्लिंग क्षमता को लगभग दोगुना करके 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (LDT) तक ले जाने की है। फैक्टशीट के अनुसार, इस लक्ष्य को अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड के योजनाबद्ध विकास के जरिए हासिल किया जाएगा। इसके लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान भी तैयार किया गया है, जिसका फोकस बुनियादी ढांचे में सुधार और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करना है।

अलंग-सोसिया क्लस्टर के अलावा, भारत में कोलकाता स्थित अमर लौह उद्योग और केरल में स्टील इंडस्ट्रियल्स केरल लिमिटेड (सिल्क) में भी जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड मौजूद हैं। इसके साथ ही, अलंग-सोसिया में स्थित सुरक्षा प्रशिक्षण और श्रम कल्याण संस्थान अब तक 1.5 लाख से अधिक श्रमिकों को प्रशिक्षित कर चुका है, जिसमें व्यावसायिक सुरक्षा और खतरनाक सामग्री प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं।

इनपुट: IANS

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