बलूचिस्तान: मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर 'सुनियोजित दमन' का आरोप लगाया
बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए एक प्रमुख संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के अनुसार, यह क्षेत्र सैन्यीकरण, आजीविका के…
बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए एक प्रमुख संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के अनुसार, यह क्षेत्र सैन्यीकरण, आजीविका के विनाश, विस्थापन और नागरिक हिंसा की एक "सुनियोजित नीति" का सामना कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने कहा कि ये अलग-अलग घटनाएँ नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
बीवाईसी ने अपने एक बयान में कहा कि बलूचिस्तान में हिंसा और विस्थापन आम नागरिकों के लिए रोजमर्रा की सच्चाई बन गए हैं। संगठन ने सड़कों के किनारे मिलने वाले बलूच नागरिकों के क्षत-विक्षत शवों का उल्लेख करते हुए इसे हिंसा की "क्रूरता और अमानवीयता" का प्रतीक बताया। बयान में कहा गया, "हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को शवों के बीच से गुजरते हुए अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जारी रखनी पड़ रही है।"
मस्तुंग जिले पर विशेष चिंता
संगठन ने विशेष रूप से मस्तुंग जिले की बिगड़ती स्थिति पर प्रकाश डाला है। आरोप है कि एक कथित सरकारी नीति के तहत वहां हजारों लोगों की आजीविका का आधार रहे बाग-बगीचों को नष्ट किया जा रहा है, जिससे उनकी जमीन और रोजगार दोनों खतरे में हैं। बीवाईसी ने कहा, "जब पूरी दुनिया जलवायु संकट के बीच जंगलों और जमीन को बचाने की कोशिश कर रही है, तब यहां पेड़ों को काटा जा रहा है।"
संगठन ने यह भी दावा किया कि मस्तुंग के शोर पारोद इलाके में स्थानीय समुदायों को पूरी तरह से विस्थापित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इसे केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि लोगों को उनकी जमीन, पानी, पशुधन और पीढ़ियों पुराने संबंधों से काटने की प्रक्रिया बताया गया है।
हिंसा का व्यापक पैटर्न
बीवाईसी का कहना है कि यह पैटर्न पूरे बलूचिस्तान में देखा जा रहा है। ग्वादर जिले के शदी-कौर इलाके का उदाहरण देते हुए संगठन ने बताया कि वहां के गांव खाली हो चुके हैं, खेत उजड़ गए हैं और समुदायों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। इसी तरह की स्थिति मस्तुंग के खडकोचा और आसपास के इलाकों में भी बन रही है, जहां नागरिक इलाकों पर ड्रोन मंडराते हैं और लोग अपने ही बागों में काम करते हुए मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं।
संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी घटनाओं को "कोलैटरल डैमेज" कहकर खारिज नहीं किया जा सकता, बल्कि इन्हें पाकिस्तानी अधिकारियों की नीतियों की मानवीय कीमत के रूप में देखा जाना चाहिए। बीवाईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की स्थिति पर ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि चुप्पी और निष्क्रियता इस हिंसा को जारी रहने देती है।
इनपुट: IANS



