बलूचिस्तान: एक महीने में 77 हत्याएं और 63 लोग लापता, मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट में पाकिस्तानी बलों पर गंभीर आरोप
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों की स्थिति पर एक प्रमुख संगठन ने गंभीर चिंता जताई है। ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में अकेले जून महीने के दौरान…
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों की स्थिति पर एक प्रमुख संगठन ने गंभीर चिंता जताई है। ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में अकेले जून महीने के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा किए गए कथित अत्याचारों का ब्योरा दिया गया है, जिसमें हत्याओं और जबरन गुमशुदगी के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट के मुताबिक, जून में बलूचिस्तान में कुल 77 लोगों की मौत दर्ज की गई, जिनमें 76 पुरुष और एक महिला शामिल थीं। चिंता की बात यह है कि इनमें से 42 पीड़ितों की पहचान भी नहीं हो सकी। रिपोर्ट यह भी उजागर करती है कि मारे गए 19 लोग वे थे, जिन्हें पहले जबरन गायब किया गया था।
हत्या और गुमशुदगी के आंकड़े
HRCB की रिपोर्ट के अनुसार, हत्याओं के लिए सबसे ज़्यादा 'कथित मुठभेड़ों' का तरीका अपनाया गया। ऐसे 39 मामले दर्ज किए गए, जो कुल मौतों का आधे से ज़्यादा हिस्सा है। इसके अलावा, 12 टारगेट किलिंग, 10 फर्जी मुठभेड़, 9 हिरासत में मौत, और 3 मामलों में शव बरामद होने की घटनाएं हुईं। दो-दो लोगों की मौत ऑनर किलिंग और अंधाधुंध गोलीबारी में हुई।
इसी अवधि में, 63 लोगों को जबरन गायब कर दिया गया, जिनमें दो महिलाएं और तीन किशोर भी शामिल थे। इनमें से केवल 17 लोगों को ही जून में रिहा किया गया, जबकि बाकी लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
सुरक्षा बलों की भूमिका पर सवाल
रिपोर्ट में इन घटनाओं के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और उनसे जुड़ी एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। हत्या के मामलों में सबसे ज्यादा 53 घटनाओं में फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) का नाम आया है। वहीं, राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) पर पांच-पांच हत्याओं में शामिल होने का आरोप है।
जबरन गुमशुदगी के मामलों में भी FC को 36 घटनाओं के लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार बताया गया है। इसके बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों का नाम 16, डेथ स्क्वॉड का 6 और CTD का 5 मामलों में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, लोगों को गायब करने के लिए सबसे आम तरीका घरों पर छापेमारी (27 मामले) रहा।
नागरिकों को डराने-धमकाने का आरोप
HRCB ने यह भी आरोप लगाया है कि जून के दौरान पाकिस्तानी बलों ने पूरे बलूचिस्तान में कई सैन्य अभियान चलाए। इन अभियानों के कारण आम नागरिकों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा और उनकी आवाजाही पर भी पाबंदियां लगाई गईं। रिपोर्ट में केच इलाके का विशेष उल्लेख है, जहां रात में बार-बार छापेमारी कर महिलाओं और बच्चों के साथ बदसलूकी और उन्हें डराने-धमकाने की घटनाएं हुईं।
इनपुट: IANS



