सोमवार, 17 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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NBFC के लिए नए नियम लाने की तैयारी में RBI, रिवॉल्विंग क्रेडिट और जोखिम प्रबंधन पर मांगी राय

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है, जिसमें उनके कामकाज और नियमों को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। समाचार एजेंसी IANS की एक…

NBFC के लिए नए नियम लाने की तैयारी में RBI, रिवॉल्विंग क्रेडिट और जोखिम प्रबंधन पर मांगी राय
(फोटो: IANS)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है, जिसमें उनके कामकाज और नियमों को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने NBFCs से प्रस्तावित 'रिवॉल्विंग क्रेडिट' नियमों पर उनकी राय मांगी है और साथ ही अपने आंतरिक नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन के ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है।

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यह बैठक पिछले हफ्ते NBFCs के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई, जो आरबीआई की निगरानी प्रक्रिया का एक हिस्सा थी। इसका मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ रहे कर्ज उत्पादों और टेक्नोलॉजी पर आधारित बिजनेस मॉडल से जुड़े जोखिमों पर नजर रखना था।

जोखिम की पहचान और अनुपालन पर जोर

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि आरबीआई ने NBFCs को निर्देश दिया है कि वे नए प्रोडक्ट्स और बिजनेस मॉडल से जुड़े किसी भी जोखिम को शुरुआती दौर में ही पहचान कर उसे दूर करें, ताकि भविष्य में किसी बड़ी कमजोरी को पनपने से रोका जा सके। केंद्रीय बैंक ने मजबूत अनुपालन, आंतरिक ऑडिट और प्रभावी जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने को कहा है। इसके अलावा, आरबीआई NBFCs के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को वैश्विक मानकों के करीब लाने पर भी विचार कर रहा है।

ग्राहक और डेटा सुरक्षा पहले

चूंकि आजकल कर्ज देने वाली कंपनियाँ ग्राहकों को जोड़ने, अंडरराइटिंग और सर्विसिंग के लिए डिजिटल माध्यमों पर बहुत अधिक निर्भर हैं, इसलिए आरबीआई ने उन्हें दो प्रमुख कानूनों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। इनमें आरबीआई का डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट शामिल हैं। साथ ही, ग्राहक शिकायतों के समाधान के लिए एक मजबूत सिस्टम बनाने को भी कहा गया है, ताकि ग्राहकों की समस्याओं का निपटारा समय पर और असरदार तरीके से हो सके।

नियामक और उद्योग की भूमिका

बैठक में स्वतः नियमन संस्थाओं (SROs) की भूमिका पर भी चर्चा हुई। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि SROs को समानांतर नियामक की तरह काम नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें नियमों का पालन सुनिश्चित कर और उभरते जोखिमों को दूर करने में मदद करके उद्योग के लिए 'सुरक्षा की पहली पंक्ति' बनना चाहिए। केंद्रीय बैंक ने यह भी माना कि NBFCs अक्सर टेक्नोलॉजी-आधारित नए उत्पादों को सबसे पहले अपनाते हैं और उनके अनुभव से मिली जानकारी नए क्षेत्रों के लिए नियम बनाने में मददगार साबित हो सकती है।

इनपुट: IANS

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