RBI इस वित्त वर्ष ब्याज दरों में नहीं करेगा कोई बदलाव? SBI रिसर्च ने बताई ये वजहें
देश की मजबूत आर्थिक रफ्तार और काबू में आती महंगाई के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अपनी नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) को जस का तस बनाए रख सकता है। समाचार एजेंसी…
देश की मजबूत आर्थिक रफ्तार और काबू में आती महंगाई के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अपनी नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) को जस का तस बनाए रख सकता है। समाचार एजेंसी IANS को मिली एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा आर्थिक हालात केंद्रीय बैंक पर दरों में किसी भी तरह के فوری बदलाव का दबाव नहीं बना रहे हैं।
रिपोर्ट का मानना है कि घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है, जिसकी पुष्टि कई प्रमुख आर्थिक संकेतक कर रहे हैं। इसी आधार पर एसबीआई रिसर्च ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ब्याज दरों में लंबे समय तक ठहराव के अपने अनुमान को बरकरार रखा है।
महंगाई का गणित और अनुमान
महंगाई के मोर्चे पर रिपोर्ट में राहत और चिंता दोनों के संकेत हैं। जुलाई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई दर 4.45% रही, जो बाजार के अनुमानों के मुताबिक ही थी। साथ ही, आयातित महंगाई भी जून 2026 के 8.1% से घटकर जुलाई में 7.3% पर आ गई।
हालांकि, रिपोर्ट में अगस्त में महंगाई के बढ़कर 4.7% तक जाने का अनुमान लगाया गया है। यह भी कहा गया है कि अक्टूबर-नवंबर के दौरान यह कुछ समय के लिए 6% के ऊपरी दायरे को भी छू सकती है। लेकिन इसके बाद, वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च 2027) में इसके फिर से घटकर 5% के करीब आने की संभावना है।
मानसून और कृषि क्षेत्र का हाल
रिपोर्ट में मानसून की स्थिति को भी अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक पहलू बताया गया है। जून में 40% की भारी कमी के बावजूद, जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होने से देश में वर्षा का कुल घाटा घटकर लगभग 13% रह गया है। विश्लेषकों का कहना है कि सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) की स्थिति अल नीनो के कुछ नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकती है, जिससे कृषि उत्पादन को सहारा मिलेगा।
यह भी गौर करने वाली बात है कि कुछ प्रमुख अनाज उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी के बावजूद, खरीफ की कुल बुआई पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 2% कम है। यह इस बात का संकेत है कि बेहतर सिंचाई सुविधाओं ने खेती पर मौसम की मार के असर को सीमित किया है।
RBI की संतुलित रणनीति
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के कुछ सदस्यों का रुख भले ही सख्त हुआ हो, लेकिन मौजूदा आंकड़े ब्याज दरें बढ़ाने की तत्काल जरूरत नहीं दर्शाते। विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल आर्थिक वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन साधने पर ही ध्यान केंद्रित रखेगा और बाजार को उसकी इस संतुलित रणनीति को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए।
इनपुट: IANS



