गुरूवार, 20 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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त्योहारी सीजन से पहले चीनी की महंगाई रोकने की तैयारी, सरकार ने बड़े खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट घटाई

आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने मिठाई निर्माताओं, शीतल पेय कंपनियों और अन्य बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए…

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की महंगाई रोकने की तैयारी, सरकार ने बड़े खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट घटाई
(फोटो: IANS)

आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने मिठाई निर्माताओं, शीतल पेय कंपनियों और अन्य बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए चीनी जमा करने की सीमा को घटा दिया है। 1 सितंबर से लागू होने वाले इस नए नियम का मकसद बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करना और जमाखोरी को रोकना है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की है। इसके तहत, हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करने वाले औद्योगिक या संस्थागत खरीदार अब अपनी 15 दिनों की जरूरत से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह नियम 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।

कौन हैं बड़े उपभोक्ता और कैसे होगी पहचान?

सरकार ने इस नियम के दायरे में आने वाले बड़े खरीदारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। इनमें मिठाई और कन्फेक्शनरी उद्योग, शीतल पेय निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और हलवाई जैसे व्यवसायी शामिल हैं। किसी भी उपभोक्ता की पहचान उसके पिछले एक साल की औसत मासिक खपत के आधार पर की जाएगी। हालांकि, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और स्थानीय निकायों से जुड़े संस्थानों को इस स्टॉक सीमा से छूट दी गई है।

कीमतों में क्यों और कितनी हुई बढ़ोतरी?

यह फैसला चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा मूल्य 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। ठीक एक साल पहले इसी दिन यह कीमत 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो सालाना आधार पर लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इससे पहले सरकार ने डीलरों के लिए भी चीनी भंडारण की सीमा 30 दिन तय कर दी थी, लेकिन कीमतों पर उसका खास असर नहीं दिखा।

कैसे होगी निगरानी?

नए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने निगरानी की व्यवस्था भी की है। प्रत्येक चीनी मिल द्वारा बड़े उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई चीनी की मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST) रिटर्न और चीनी से संबंधित HSN कोड का उपयोग किया जाएगा, ताकि वास्तविक खपत और खरीदारी के आंकड़ों का मिलान हो सके।

इनपुट: IANS

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