राजस्थान: दूसरे राज्यों के निजी वाहनों से टैक्स वसूली अवैध, हाई कोर्ट का परिवहन विभाग को बड़ा झटका
राजस्थान में दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी वाहनों से टैक्स वसूलने की परिवहन विभाग की कार्रवाई पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। एक महत्वपूर्ण फैसले में, राजस्थान हाई कोर्ट ने इस वसूली को अवैध घोषि…
राजस्थान में दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी वाहनों से टैक्स वसूलने की परिवहन विभाग की कार्रवाई पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। एक महत्वपूर्ण फैसले में, राजस्थान हाई कोर्ट ने इस वसूली को अवैध घोषित करते हुए विभाग को जब्त किए गए वाहन तत्काल छोड़ने और वसूला गया टैक्स 30 दिनों के भीतर लौटाने का आदेश दिया है। यह फैसला उन हजारों वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत है जिनके वाहन हरियाणा, दिल्ली, पंजाब जैसे राज्यों में पंजीकृत हैं।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना किसी विशिष्ट वैधानिक अधिसूचना के परिवहन विभाग दूसरे राज्यों में पंजीकृत गैर-परिवहन वाहनों (निजी कारों और जीपों) पर टैक्स नहीं लगा सकता। यह मामला तब सामने आया जब हरपी कोर नेटवर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और अन्य वाहन मालिकों ने विभाग की कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।
क्या था पूरा विवाद?
दरअसल, राजस्थान परिवहन विभाग के हवाई दस्तों ने नियमित जांच के दौरान दूसरे राज्यों की नंबर प्लेट वाली कई निजी गाड़ियों को रोका। विभाग का तर्क था कि ये वाहन 30 दिनों से अधिक समय से राजस्थान में चल रहे थे, इसलिए राजस्थान मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1951 और संबंधित नियमों के तहत उन पर टैक्स बनता है। इसी आधार पर विभाग ने प्रवर्तन कार्रवाई शुरू करते हुए कई वाहन जब्त कर लिए और टैक्स की मांग की।
याचिकाकर्ताओं की दलील
वाहन मालिकों ने अपनी याचिका में कहा कि उन्होंने अपने-अपने राज्यों (जैसे हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश) में पंजीकरण के समय पहले ही आजीवन सड़क कर (Life-time Road Tax) का भुगतान कर दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि सिर्फ 30 दिन से ज्यादा राजस्थान में रहने के आधार पर दोबारा एकमुश्त टैक्स की मांग का कोई कानूनी आधार नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 265 का हवाला देते हुए कहा कि कानून के अधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया जा सकता।
सरकार का पक्ष और कोर्ट का फैसला
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने विभाग की कार्रवाई का बचाव किया। सरकार ने 10 जुलाई, 2024 की एक अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि यह अन्य राज्यों में पंजीकृत वाहनों पर भी लागू होती है, इसलिए टैक्स की मांग और वाहनों की जब्ती कानूनी रूप से सही थी।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, खंडपीठ ने पाया कि 10 जुलाई की अधिसूचना यात्री और मालवाहक वाहनों के लिए कर दरें तो तय करती है, लेकिन ऐसी कोई अलग अधिसूचना नहीं है जो विशेष रूप से दूसरे राज्यों में पंजीकृत निजी कारों पर एकमुश्त कर लगाने का अधिकार देती हो। इसी आधार पर कोर्ट ने विभाग की कार्रवाई को अवैध करार दिया।
इनपुट: IANS



