बांग्लादेश: खुलना में रवींद्रनाथ टैगोर के भित्ति-चित्र पर स्याही फेंकी, आक्रोश और निंदा का दौर
बांग्लादेश के खुलना शहर में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के एक भित्ति-चित्र (म्यूरल) को उपद्रवियों द्वारा काली स्याही से खराब कर दिया गया है। इस घटना ने स्थानीय लोगों और सांस्कृतिक…
बांग्लादेश के खुलना शहर में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के एक भित्ति-चित्र (म्यूरल) को उपद्रवियों द्वारा काली स्याही से खराब कर दिया गया है। इस घटना ने स्थानीय लोगों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, जिन्होंने इसे एक संकीर्ण और बीमार मानसिकता का प्रतीक बताया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, खुलना सदर पुलिस स्टेशन को शुक्रवार दोपहर इस घटना की सूचना मिली, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई। प्रभारी अधिकारी लुकमान हुसैन ने बताया कि शुक्रवार को छुट्टी होने के कारण सड़क किनारे की सभी दुकानें बंद थीं, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि भित्ति-चित्र को कब और किसने खराब किया।
शहर की सांस्कृतिक विरासत पर हमला
यह भित्ति-चित्र खुलना सिटी कॉरपोरेशन (केसीसी) की एक पहल का हिस्सा थे, जिन्हें प्रधानमंत्री तारिक रहमान के प्रस्तावित दौरे से पहले बनवाया गया था। इन चित्रों में क्षेत्र की कला, साहित्य और संस्कृति को समृद्ध करने वाली महान हस्तियों को सम्मान दिया गया था। ओल्ड जेसोर रोड की दीवार पर रवींद्रनाथ टैगोर के अलावा फकीर लालन शाह, कलाकार एस.एम. सुल्तान, काजी नजरुल इस्लाम, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और कवि माइकल मधुसूदन दत्त जैसे कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों के चित्र बनाए गए थे। हालांकि, निशाना सिर्फ टैगोर के चित्र को ही बनाया गया।
केसीसी के प्रशासक नजरुल इस्लाम मंजू ने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा, "चित्र को खराब करके उन्होंने अपनी संकीर्ण सोच और बीमार मानसिकता को उजागर कर दिया है।"
संगठित साजिश की आशंका
सांस्कृतिक संगठन 'नाट्यलोक' के महासचिव शरीफुल इस्लाम सलीम ने इस घटना के पीछे किसी संगठित समूह के होने की आशंका जताई है। 'द डेली स्टार' के अनुसार, उन्होंने कहा, "उन्होंने ढाका में भी ऐसी ही हरकतें की हैं... यह मामला सिर्फ रवींद्रनाथ टैगोर तक ही सीमित नहीं रहेगा; वे अन्य महान हस्तियों को भी निशाना बना सकते हैं।"
सलीम ने इस बात पर जोर दिया कि कुछ युवाओं को गुमराह कर ऐसी शर्मनाक हरकतें करवाई जा रही हैं। उन्होंने टैगोर को बांग्लादेश की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग बताते हुए समाज के सभी वर्गों से दोषियों के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह घटना ढाका में बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी के बाहर टैगोर के एक भित्ति-चित्र को खराब किए जाने के लगभग एक महीने बाद हुई है। पिछले महीने हुई उस घटना पर बांग्लादेश के कम से कम 37 प्रमुख नागरिकों ने गहरी चिंता जताते हुए चेतावनी दी थी कि ऐसी घटनाएं धार्मिक चरमपंथियों का हौसला बढ़ा सकती हैं और देश में सांप्रदायिक तनाव को गहरा कर सकती हैं।
इनपुट: IANS



