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पंजाब में पराली जलाने के खिलाफ बड़ी पहल, किसानों ने खरीदीं 21,000 से ज़्यादा मशीनें

पंजाब में किसान अब पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने बुधवार को बताया कि चालू सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन…

पंजाब में पराली जलाने के खिलाफ बड़ी पहल, किसानों ने खरीदीं 21,000 से ज़्यादा मशीनें
(फोटो: IANS)

पंजाब में किसान अब पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक अपना रहे हैं। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुदियां ने बुधवार को बताया कि चालू सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) के लिए 21,019 नई मशीनें खरीदी गई हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बड़े पैमाने पर हुई खरीद के पीछे राज्य सरकार द्वारा दी जा रही 50 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी एक बड़ा कारण है, जो फसल अवशेषों को लेकर किसानों की सोच में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

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इन मशीनों में सुपर सीडर किसानों की पहली पसंद बनकर उभरा है, जिसकी कुल 14,274 इकाइयां खरीदी गईं। यह उपकरण किसानों को धान के अवशेषों में सीधे गेहूं की बुवाई करने की सुविधा देता है, जिससे न केवल समय बचता है बल्कि मिट्टी की नमी भी बनी रहती है।

किसानों ने कौन-सी मशीनें ज़्यादा खरीदीं?

आंकड़ों के अनुसार, सुपर सीडर के बाद मल्चर (1,721 यूनिट), हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी हल (1,346 यूनिट), ज़ीरो टिल ड्रिल (1,123 यूनिट) और बेलिंग मशीन (927 यूनिट) सबसे ज़्यादा लोकप्रिय रहीं। इसके अलावा, पराली इकट्ठा करने में काम आने वाले स्ट्रॉ रेक की भी 874 इकाइयां खरीदी गईं। मंत्री खुदियां ने बताया कि ये मशीनें पराली को बोझ समझने के बजाय एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देखने में मदद कर रही हैं।

सब्सिडी और सरकारी योजना का असर

पंजाब सरकार की इस पहल में सब्सिडी की अहम भूमिका है। व्यक्तिगत किसानों को मशीनरी की खरीद पर 50% की छूट मिल रही है, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC), किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियों और पंचायतों को 80% सब्सिडी दी जा रही है। मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों को 2026-27 के लिए बनाई गई 576 करोड़ रुपए की एक व्यापक कार्य योजना का समर्थन प्राप्त है।

इन पहलों के सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगे हैं। राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की भारी कमी आई है, जो 2022 में 49,922 से घटकर 2025 में 5,114 रह गईं। इस उल्लेखनीय प्रगति के लिए पंजाब को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। मंत्री ने भगवंत मान सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य कृषि समुदाय का समर्थन करने और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह समर्पित है।

इनपुट: IANS

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News4Social पंजाब डेस्क

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