पेपर लीक पर अब और सख़्ती: नए बिल में 10 साल जेल, 5 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव
परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की बढ़ती चिंताओं के बीच, सरकार ने मौजूदा कानून को और सख्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम)…
परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की बढ़ती चिंताओं के बीच, सरकार ने मौजूदा कानून को और सख्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026' पर चर्चा शुरू हुई, जिसका उद्देश्य दोषियों के लिए सज़ा और जुर्माने को काफी बढ़ाना है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह विधेयक मौजूदा 2024 के कानून में संशोधन करेगा ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता को और मजबूत किया जा सके।
प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने इस संशोधन को मौजूदा व्यवस्था को और असरदार तथा सख्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
कानून में क्या बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं?
यह नया संशोधन विधेयक मुख्य रूप से सजा और जुर्माने की राशि में बढ़ोतरी पर केंद्रित है। इसके तहत अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषियों के लिए न्यूनतम जेल की सजा तीन साल से बढ़ाकर पांच साल करने का प्रस्ताव है, जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसी तरह, अधिकतम जुर्माना भी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए किया जाएगा।
संगठित तौर पर परीक्षा में हेरफेर करने वाले गिरोहों के लिए और भी कड़े प्रावधान हैं। उनके लिए न्यूनतम सजा को पांच साल से बढ़ाकर सात साल किया जाएगा और साथ ही 10 करोड़ रुपए का भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।
सर्विस प्रोवाइडर पर भी बढ़ेगी सख्ती
परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता कंपनियों (सर्विस प्रोवाइडर्स) की जवाबदेही भी बढ़ाई गई है। उन पर लगने वाले जुर्माने की राशि को एक करोड़ रुपए से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, उन्हें सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से रोकने की अवधि को भी चार साल से बढ़ाकर आठ साल किया जा सकता है।
तेजी से होगी जांच और सुनवाई
प्रस्तावित कानून में मामलों के निपटारे के लिए एक सख्त समय-सीमा भी तय की गई है। केंद्र सरकार द्वारा मामला भेजे जाने के दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट-ट्रैक अदालतों के लिए विशेष सत्र न्यायालयों को नामित किया जाएगा। चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि मूल कानून, 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024', इसी साल जून में लागू हुआ था। इसमें प्रश्न पत्र लीक करने और नकली परीक्षा वेबसाइट चलाने जैसे 15 तरह के अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया था, हालांकि उम्मीदवारों को इसके दायरे से बाहर रखा गया था।
इनपुट: IANS



