शनिवार, 12 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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केरल में एक दशक बाद लौटा बिजली कटौती का दौर, सतीशन सरकार पर विपक्ष का चौतरफा हमला

केरल में लगभग एक दशक की राहत के बाद बिजली कटौती का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से रात में हो रही लंबी कटौती ने वी.डी.…

केरल में एक दशक बाद लौटा बिजली कटौती का दौर, सतीशन सरकार पर विपक्ष का चौतरफा हमला
(फोटो: IANS)

केरल में लगभग एक दशक की राहत के बाद बिजली कटौती का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से रात में हो रही लंबी कटौती ने वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को मुश्किल में डाल दिया है और विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बड़ा हथियार थमा दिया है। मई में सत्ता संभालने के बाद से यह पहला मौका है जब सरकार किसी मुद्दे पर इतने गंभीर राजनीतिक दबाव का सामना कर रही है।

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राज्य भर के उपभोक्ता टीवी चैनलों पर अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, जिनमें से कई का कहना है कि उन्होंने पिछले दस सालों में इतनी बार बिजली जाते नहीं देखी। जनता की इसी नाराजगी ने वामपंथी दलों के सोशल मीडिया नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है। मीम्स और पोस्ट के जरिए मौजूदा सरकार की पिछली LDF सरकार से तुलना की जा रही है।

सरकार और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप

इस संकट के लिए सतीशन सरकार और बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने पिछली LDF सरकार के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका मुख्य तर्क ओमन चांडी सरकार के समय हुए एक बिजली खरीद समझौते को रद्द करना है। हालांकि, आलोचक इस पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि जब पिनाराई विजयन सरकार ने अप्रैल में पद छोड़ा था, तब राज्य में ऐसी कोई कटौती नहीं हो रही थी।

वहीं, पूर्व बिजली मंत्री एमएम मणि ने आरोप लगाया है कि सरकार संकट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है ताकि बाहर से महंगी बिजली खरीदी जा सके, जिसमें निहित स्वार्थ हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर वामपंथ का सीधा नैरेटिव है कि अगर विजयन सत्ता में होते तो केरल को यह दिन नहीं देखना पड़ता।

संकट के कारण और समाधान की दिशा

बिजली मंत्री सनी जोसेफ के अनुसार, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बढ़ते चलन से बिजली की मांग में करीब 1,000 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कोयले की कमी ने हालात और खराब कर दिए हैं। केरल अपनी कुल जरूरत का केवल 25 प्रतिशत ही उत्पादन करता है और नए बिजली प्रोजेक्ट शुरू करने में देरी भी एक बड़ी चुनौती है।

दीर्घकालिक समाधान के तौर पर, जोसेफ ने शनिवार को बताया कि सरकार एक आकर्षक टैरिफ सिस्टम पर विचार कर रही है। इसके तहत, जो घर अपनी स्टोर की हुई सौर ऊर्जा केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) को वापस देंगे, उन्हें फायदा मिलेगा। सरकार कम्युनिटी बैटरी सिस्टम और घरों में बैटरी स्टोरेज लगाने के लिए सब्सिडी देने पर भी विचार कर रही है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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