केरल में बिजली कटौती: पुराने पावर एग्रीमेंट रद्द करने पर भाजपा ने सरकार को घेरा, 2130 करोड़ के नुकसान का आरोप
केरल इन दिनों गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है, जिसके चलते पूरे राज्य में रात के समय बार-बार बिजली कटौती हो रही है। इस संकट के बीच, पिछली सरकार द्वारा दो कंपनियों के साथ किए गए दीर्घकालिक बिजली खरीद…
केरल इन दिनों गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है, जिसके चलते पूरे राज्य में रात के समय बार-बार बिजली कटौती हो रही है। इस संकट के बीच, पिछली सरकार द्वारा दो कंपनियों के साथ किए गए दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों को रद्द करने का फैसला एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस फैसले को लेकर तत्कालीन पिनाराई विजयन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने दावा किया है कि सस्ते बिजली अनुबंधों को रद्द करने के कारण राज्य पर 2,130 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य कुम्मनम राजशेखरन ने आरोप लगाया है कि यह फैसला तत्कालीन सरकार, पूर्व बिजली मंत्री के. कृष्णनकुट्टी और केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग की मिलीभगत का परिणाम था।
समझौते और उनके रद्द होने का मामला
कुम्मनम ने बताया कि 2014 में यूडीएफ सरकार के कार्यकाल में झाबुआ पावर और जिंदल पावर के साथ 25 साल के लिए दो समझौते हुए थे। इन समझौतों के तहत केरल को 465 मेगावॉट बिजली 4.26 रुपये से 4.29 रुपये प्रति यूनिट की सस्ती दर पर मिलनी थी। हालांकि, मई 2023 में केरल राज्य विद्युत नियामक आयोग ने प्रक्रियात्मक और तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए इन समझौतों को रद्द कर दिया।
भाजपा नेता के अनुसार, इस कदम के कारण केरल को अनुबंधित सस्ती बिजली से वंचित होना पड़ा। नतीजतन, केरल राज्य बिजली बोर्ड (KSEB) को पावर एक्सचेंजों और अन्य बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जहां बिजली की दरें बहुत अधिक हैं। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड को कई बार 7 रुपये से 10 रुपये प्रति यूनिट की ऊंची कीमत पर बिजली खरीदनी पड़ी है।
चेतावनी की अनदेखी और जांच की मांग
राजशेखरन ने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्य सचिव पॉल एंटनी और केएसईबी के चेयरमैन एनएस पिल्लई ने सरकार को इस फैसले के खतरों के बारे में आगाह किया था, लेकिन उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने नवंबर 2022 में सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य सचिव टीके जोस को नियामक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त करने के फैसले पर भी सवाल उठाए।
भाजपा ने अब इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। कुम्मनम राजशेखरन ने कहा कि समझौतों को रद्द करने के फैसले, नियामक आयोग और अधिकारियों की भूमिका तथा पिछली सरकार के निर्णयों की गहन पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि कोई अनियमितता या कर्तव्य में लापरवाही पाई जाती है तो कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, राज्य में बिजली की स्थिति गंभीर बनी हुई है और आने वाले हफ्तों में भी कटौती जारी रहने की आशंका है।
इनपुट: IANS



