शनिवार, 12 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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मानवाधिकारों पर गंभीर चिंता: पाकिस्तान के लिए यूरोपीय संघ का GSP+ दर्जा खतरे में

यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को दी जाने वाली विशेष व्यापारिक सुविधाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मानवाधिकारों के गिरते रिकॉर्ड, विशेष रूप से जबरन गुमशुदगी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के दमन के मामलों…

मानवाधिकारों पर गंभीर चिंता: पाकिस्तान के लिए यूरोपीय संघ का GSP+ दर्जा खतरे में
(फोटो: IANS)

यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को दी जाने वाली विशेष व्यापारिक सुविधाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मानवाधिकारों के गिरते रिकॉर्ड, विशेष रूप से जबरन गुमशुदगी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के दमन के मामलों में, पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि पाकिस्तान ने ठोस और सत्यापित सुधार नहीं किए तो उसका 'जीएसपी प्लस' दर्जा खतरे में पड़ सकता है।

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यह चेतावनी पाकिस्तान के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह यूरोपीय संघ की 'जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस' (GSP+) का सबसे बड़ा लाभार्थी है। इस सुविधा के तहत पाकिस्तानी निर्यातों को यूरोपीय बाजारों में शुल्क में छूट मिलती है। 2014 से इस योजना का लाभ उठा रहे पाकिस्तान ने अकेले 2024 में लगभग 73.2 करोड़ यूरो के शुल्क की बचत की। उस वर्ष उसके 7.5 अरब यूरो के निर्यात इस योजना के पात्र थे।

क्यों सख्त हुआ यूरोपीय संघ का रुख?

यूरोपीय आयोग की 2023-2025 की रिपोर्ट में पाकिस्तान में कई क्षेत्रों में मानवाधिकार की स्थिति बिगड़ने का उल्लेख है। इनमें न्यायेतर हत्याएं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश, पत्रकारों पर दबाव, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जबरन मजदूरी जैसे मुद्दे शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जबरन गुमशुदगी के मामलों में आज तक किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है, जबकि पाकिस्तानी आयोग ने ही 2025 में 273 नए मामले दर्ज किए। मानवाधिकार संगठन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने का दावा करते हैं।

क्या है GSP+ और पाकिस्तान पर क्या होगा असर?

जीएसपी प्लस योजना का उद्देश्य विकासशील देशों को व्यापार के माध्यम से सतत विकास और सुशासन के लिए प्रोत्साहित करना है। यदि पाकिस्तान से यह सुविधा छिन जाती है तो उसके कपड़ा और परिधान क्षेत्र पर सबसे बुरा असर पड़ेगा, जो यूरोपीय संघ को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 70 से 76 प्रतिशत हिस्सा है। इस सुविधा के बिना कुछ कपड़ा उत्पादों पर 9 से 12 प्रतिशत तक का अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।

हाल ही में स्पेन की यूरोपीय सांसद सैंड्रा गोमेज लोपेज और पाकिस्तान में यूरोपीय संघ के राजदूत रायमुंडास कारोब्लिस ने भी पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठाए हैं। कारोब्लिस ने चेतावनी दी कि देश एक 'बेहद महत्वपूर्ण मोड़' पर है और ठोस सुधारों के बिना जीएसपी प्लस का भविष्य 'बिल्कुल भी सुनिश्चित नहीं' है। यूरोपीय संघ की नई जीएसपी प्लस व्यवस्था 1 जनवरी, 2027 से लागू होगी, जिसमें अधिक कड़े नियम शामिल होंगे। पाकिस्तान को 2028 के अंत तक अपनी वर्तमान स्थिति बनाए रखने की अनुमति मिल सकती है, लेकिन उसके बाद उसे नए नियमों के तहत फिर से आवेदन करना होगा।

इनपुट: IANS

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