सोनम वांगचुक पर पुलिस एक्शन को संजय राउत ने बताया तानाशाही, कहा- आंदोलन से ध्यान भटकाने की साज़िश
शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को अनशन से जबरन हटाने की पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस कदम को 'तानाशाही' करार देते हुए आरोप लगाया कि यह…
शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को अनशन से जबरन हटाने की पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस कदम को 'तानाशाही' करार देते हुए आरोप लगाया कि यह महाराष्ट्र में उनकी पार्टी के 'राम रक्षा' आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए एक जानबूझकर की गई कोशिश है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, राउत ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार उन मूल मुद्दों को संबोधित करने में पूरी तरह विफल रही है, जिनके लिए वांगचुक 21 दिनों से अनशन कर रहे थे।
शनिवार को नागपुर में राउत ने कहा, "यह पूरी तरह तानाशाही है। सोनम वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर कोई कदम नहीं उठाया।" उन्होंने आगे कहा कि जो व्यक्ति देश के लाखों छात्रों के भविष्य के लिए अपनी जान दांव पर लगाने को तैयार था, उसे पुलिस ने जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया, जो यह दिखाता है कि देश को किस तरह की तानाशाही की ओर ले जाया जा रहा है।
नागपुर के आंदोलन से जुड़ाव
संजय राउत ने इस पुलिस कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए इसे सीधे तौर पर महाराष्ट्र की राजनीति से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यह कदम ठीक उस समय उठाया जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में नागपुर में 'राम रक्षा' आंदोलन शुरू होने वाला था। राउत के अनुसार, यह कार्रवाई मीडिया और जनता का ध्यान अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आयोजित इस "बड़े एल्गार" से हटाने के लिए की गई थी। उन्होंने कहा, "उन्हें जबरन हिरासत में लेकर अस्पताल भेजा गया ताकि सुर्खियां बदल जाएं।" हालांकि, राउत ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस रणनीति से पीछे नहीं हटेगी और उद्धव ठाकरे नागपुर पहुंचकर शाम 4 बजे रामनगर स्थित राम मंदिर से आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।
सुप्रिया सुले ने भी की थी सरकार की आलोचना
संजय राउत से एक दिन पहले, शुक्रवार को एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने भी जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके से मुलाकात कर अपना समर्थन दिया था। उन्होंने केंद्र सरकार को 'बेहद असंवेदनशील' बताते हुए कहा था कि सत्ता पक्ष से किसी को भी वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए थी। सुले ने नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ियों को देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा अपराध बताया और वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह भी किया था।
इनपुट: IANS



