गुरूवार, 30 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारत-न्यूज़ीलैंड साझेदारी: पीएम मोदी के दौरे के बाद रक्षा और व्यापार संबंधों में आई नई मज़बूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए युग में पहुँचा दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह यात्रा 20 वर्षों में किसी भारतीय…

भारत-न्यूज़ीलैंड साझेदारी: पीएम मोदी के दौरे के बाद रक्षा और व्यापार संबंधों में आई नई मज़बूती
(फोटो: IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए युग में पहुँचा दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह यात्रा 20 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूज़ीलैंड यात्रा थी, जिसके दौरान संबंधों को एक पूर्ण रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया। यह जानकारी न्यूज़ीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल अफेयर्स (NZIIA) द्वारा प्रकाशित एक लेख में सामने आई है।

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पीएम मोदी और उनके न्यूज़ीलैंड के समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन ने इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाना है। दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर (लगभग 4.2 अरब डॉलर) तक पहुँचाने का एक औपचारिक लक्ष्य भी निर्धारित किया।

रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान

इस साझेदारी का एक अहम पहलू रक्षा और समुद्री सुरक्षा है। दोनों देशों ने एक आपसी लॉजिस्टिक्स सपोर्ट अरेंजमेंट (Mutual Logistics Support Arrangement) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत, तैनाती के दौरान भारतीय नौसेना और न्यूज़ीलैंड रक्षा बल ईंधन भरने और रखरखाव के लिए एक-दूसरे की सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे। इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सूचना साझाकरण और परिचालन समन्वय को मजबूत करने के लिए समुद्री सहयोग पर भी एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया।

'रोडमैप टू 2030' की रूपरेखा

इस यात्रा का एक मुख्य परिणाम 'रोडमैप टू 2030' है, जो अगले चार वर्षों के लिए सहयोग की रूपरेखा तय करता है। इस रोडमैप में रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, कृषि, पर्यटन, खेल और विज्ञान जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। कुल मिलाकर, पीएम मोदी के इस दौरे से 18 परिणाम सामने आए, जिनमें 10 समझौते और समझौता ज्ञापन शामिल हैं। आतंकवाद से मुकाबले के लिए एक नया संयुक्त कार्य समूह भी बनाया जाएगा, जो खुफिया जानकारी साझा करने में मदद करेगा।

लेख में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और 2030 तक इसके तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है, जिसकी जीडीपी लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर होगी।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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