रविवार, 26 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
देश

बिहार के सीतामढ़ी का 'कचरे से कमाई' मॉडल: पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की सराहना

बिहार के सीतामढ़ी जिले में सिंगल-यूज प्लास्टिक के कचरे से सार्वजनिक जगहों के लिए बेंच बनाने की एक अनूठी पहल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें…

बिहार के सीतामढ़ी का 'कचरे से कमाई' मॉडल: पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की सराहना
(फोटो: IANS)

बिहार के सीतामढ़ी जिले में सिंगल-यूज प्लास्टिक के कचरे से सार्वजनिक जगहों के लिए बेंच बनाने की एक अनूठी पहल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में उन्होंने इस 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल को प्लास्टिक प्रदूषण जैसी वैश्विक चुनौती का एक प्रभावी और सरल समाधान बताया।

विज्ञापन

समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद कर रही है, बल्कि लोगों, विशेषकर बच्चों में जागरूकता भी बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चे यह सीख रहे हैं कि जिसे वे बेकार प्लास्टिक समझकर फेंक देते थे, उसे सही तकनीक और प्रबंधन से समाज के लिए उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। पीएम मोदी के शब्दों में, इससे 'रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल' का सिद्धांत अब केवल नारा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है।

क्या है सीतामढ़ी का 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल?

इस पहल के तहत, जिले भर से सिंगल-यूज प्लास्टिक कचरा एकत्र किया जाता है। स्थानीय इकाई के साथ मिलकर जिला प्रशासन इस कचरे की सफाई, छंटाई और प्रोसेसिंग करता है। इसके बाद, इस रिसाइकिल किए गए प्लास्टिक से मजबूत, टिकाऊ और आकर्षक बेंचें तैयार की जाती हैं। इन बेंचों को सरकारी स्कूलों, पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जा रहा है।

एक बेंच बनाने में लगभग 40 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। परियोजना के एक चरण के आँकड़ों के अनुसार, डुमरा, रीगा, बाजपट्टी और रुन्नीसैदपुर जैसे चार प्रखंडों से करीब 8,000 किलोग्राम प्लास्टिक इकट्ठा किया गया। इसमें से 4,000 किलोग्राम प्लास्टिक को रिसाइकिल कर 85 बेंचें तैयार की गईं।

पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार भी

प्रधानमंत्री ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन की भूमिका की भी प्रशंसा की। यह मॉडल केवल पर्यावरण के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। कचरे के संग्रह, छंटाई, परिवहन और प्रोसेसिंग की प्रक्रिया में लोगों को काम मिल रहा है। इसके अलावा, इस मॉडल में राजस्व साझा करने की व्यवस्था भी है, जिससे प्रशासन और औद्योगिक साझेदार, दोनों को आर्थिक लाभ होता है।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →