शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान में गरीबी का बढ़ता संकट: 6 साल में 6.4% की वृद्धि, आर्थिक चुनौतियां और बाढ़ जिम्मेदार

पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों से गंभीर आर्थिक संकट, विनाशकारी बाढ़ और कोरोना महामारी के संयुक्त प्रभाव से जूझ रहा है, जिसका सीधा असर वहां की गरीबी दर पर पड़ा है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई एक…

पाकिस्तान में गरीबी का बढ़ता संकट: 6 साल में 6.4% की वृद्धि, आर्थिक चुनौतियां और बाढ़ जिम्मेदार
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों से गंभीर आर्थिक संकट, विनाशकारी बाढ़ और कोरोना महामारी के संयुक्त प्रभाव से जूझ रहा है, जिसका सीधा असर वहां की गरीबी दर पर पड़ा है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच पाकिस्तान में प्रतिदिन तीन डॉलर की गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी दर में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

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रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और अफगानिस्तान-पाकिस्तान (मेनाप) क्षेत्र की कुल अत्यंत गरीब आबादी का लगभग आधा हिस्सा अकेले पाकिस्तान में रहता है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां गरीबी का स्तर महामारी से पहले के दौर से भी ऊपर बना हुआ है और लगातार बढ़ रहा है।

क्षेत्रीय गरीबी के चौंकाने वाले आंकड़े

आंकड़ों के अनुसार, मेनाप क्षेत्र में प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर गुजारा करने वाले लोगों में से करीब 48 प्रतिशत पाकिस्तानी हैं। वहीं, अफगानिस्तान, सीरिया और यमन की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 47 प्रतिशत है। हाल के अनुमान बताते हैं कि जिबूती, पाकिस्तान, सीरिया और यमन में 20 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रतिदिन तीन डॉलर की गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रही है।

वैश्विक स्तर पर तुलना करें तो 2024 में जहां दुनिया की 10.4 प्रतिशत आबादी प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर जी रही थी, वहीं मेनाप क्षेत्र में यह आंकड़ा 14.3 प्रतिशत था।

आर्थिक सुधार की धीमी उम्मीद

इन चुनौतियों के बावजूद, रिपोर्ट में पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर में धीरे-धीरे सुधार का अनुमान लगाया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश की अनुमानित जीडीपी वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जिसके वित्त वर्ष 2025-26 में 3.7 प्रतिशत और 2026-27 में 3.8 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। सेवा क्षेत्र को इस आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख वाहक माना जा रहा है।

इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पाकिस्तान का चालू खाता घाटा जीडीपी का 0.1 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

खाद्य असुरक्षा और भविष्य की चिंताएं

रिपोर्ट में खाद्य असुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। यमन, कब्जे वाले वेस्ट बैंक और गाजा के अलावा अफगानिस्तान, जिबूती, लेबनान और पाकिस्तान में भी खाद्य असुरक्षा का दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2026 के अंत में सामान्य से अधिक मजबूत अल नीनो की आशंका खाद्य कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है, जिससे गरीब और कमजोर वर्गों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

इनपुट: IANS

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