शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हवाई हमले: क्या इस्लामाबाद की रणनीति नाकाम हो रही है?

अफगानिस्तान में अपना खोया हुआ प्रभाव फिर से हासिल करने की कोशिश में पाकिस्तान लगातार हवाई हमले कर रहा है, लेकिन इनका असर सीमित दिख रहा है और यह रणनीति गंभीर सवाल खड़े कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की…

अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हवाई हमले: क्या इस्लामाबाद की रणनीति नाकाम हो रही है?
(फोटो: IANS)

अफगानिस्तान में अपना खोया हुआ प्रभाव फिर से हासिल करने की कोशिश में पाकिस्तान लगातार हवाई हमले कर रहा है, लेकिन इनका असर सीमित दिख रहा है और यह रणनीति गंभीर सवाल खड़े कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों से यह ज़ाहिर होता है कि इस्लामाबाद काबुल पर अपनी रणनीतिक पकड़ वापस चाहता है, लेकिन तालिबान को सैन्य दबाव से झुकाने की कोशिश उलटी पड़ सकती है।

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तालिबान प्रशासन इन हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहा है, जिसमें जवाबी कार्रवाई की धमकियां और सीमा पर गोलीबारी जैसी घटनाएं शामिल हैं। हालिया घटना गुरुवार तड़के की है, जब पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के कुनार और हेलमंद प्रांतों में कथित तौर पर नागरिक ठिकानों पर हवाई हमले किए।

हालिया हमलों का ब्योरा

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि इन ताजा हमलों में तीन घर नष्ट हो गए, जिससे नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। हमले में 11 अन्य लोग घायल हुए। इससे पहले, 24 सितंबर को भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर 10 ठिकानों पर हवाई और ड्रोन हमले किए थे। अफगान मीडिया के मुताबिक, इन हमलों में कंधार भी शामिल था, जिसे तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा का प्रमुख ठिकाना माना जाता है। खोस्त और पक्तिया प्रांतों पर भी हमले हुए थे।

इसी तरह 21 सितंबर को कुनार और पक्तिका प्रांतों में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों में तीन नागरिकों (एक पुरुष, एक महिला और एक बच्ची) की जान गई थी, जिसकी पुष्टि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने भी की थी। हालांकि, पाकिस्तान ने इस कार्रवाई में 28 आतंकवादियों के मारे जाने का दावा किया था, जिसके बाद काबुल समेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए।

हमलों के पीछे की वजह

'द डिप्लोमैट' की रिपोर्ट बताती है कि 21 सितंबर का हमला खैबर पख्तूनख्वा के कोहाट में 18 सितंबर को हुए एक पुलिस परिसर पर हमले की जवाबी कार्रवाई थी। इस हमले में 16 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, जिसकी जिम्मेदारी इत्तिहादुल मुजाहिदीन पाकिस्तान (आईएमपी) ने ली थी। यह संगठन हाफिज गुल बहादर समूह का गठबंधन है और इसके तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से करीबी संबंध हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने हमलावरों में से एक की पहचान अफगान नागरिक के तौर पर की थी।

पाकिस्तान का रणनीतिक लक्ष्य

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच पाकिस्तान ने कम से कम 15 बार अफगानिस्तान के अंदर हवाई और ड्रोन हमले किए। एक निजी अनुमान के मुताबिक, इस साल सीमा पार हिंसा में 1,100 से ज्यादा नागरिक मारे गए या घायल हुए। रिपोर्ट का विश्लेषण है कि टीटीपी और आईएमपी को नियंत्रित करने के अलावा, पाकिस्तान का बड़ा लक्ष्य अफगानिस्तान में एक कमजोर और उस पर निर्भर राज्य बनाए रखना है। कभी सहयोगी रहा तालिबान अब चुनौती बन गया है, इसलिए इस्लामाबाद सैन्य दबाव को एक विकल्प के तौर पर देख रहा है। हालांकि, रिपोर्ट चेतावनी देती है कि तालिबान ने भी पाकिस्तान से ही दबाव बनाने की कला सीखी है, और बमबारी से उसे झुकाने की कोशिश एक अदूरदर्शी कदम साबित हो सकती है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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