सिंधु जल संधि: भारत ने कहा - पाकिस्तान ने 50 साल में सद्भावना खत्म की, आतंकी ढांचा नहीं
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि पाकिस्तान के रवैये ने 1960 की सिंधु जल संधि की बुनियाद यानी 'सद्भावना और दोस्ती' को पूरी तरह खत्म कर दिया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भार…
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा है कि पाकिस्तान के रवैये ने 1960 की सिंधु जल संधि की बुनियाद यानी 'सद्भावना और दोस्ती' को पूरी तरह खत्म कर दिया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत द्वारा संधि को निलंबित करना सिर्फ उस हकीकत को औपचारिक रूप देना है जिसे पाकिस्तान ने आतंकवाद और शत्रुतापूर्ण व्यवहार से पहले ही नष्ट कर दिया था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, क्वात्रा ने यह बात न्यूजवीक में लिखे एक लेख में कही।
भारत ने पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस संधि को निलंबित करने का फैसला किया था। यह निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से त्याग नहीं देता। क्वात्रा के अनुसार, पाकिस्तान के आतंकवादी अभियानों के कारण भारत में 40,000 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें संसद, मुंबई, उरी और पठानकोट जैसे बड़े हमले शामिल हैं।
संधि की असमानता और भारत का रुख
1960 में हुई सिंधु जल संधि के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों पर नियंत्रण मिला, जिनमें बेसिन का केवल 20% पानी है, जबकि पाकिस्तान को 80% पानी वाली तीन पश्चिमी नदियाँ मिलीं। राजदूत क्वात्रा ने बताया कि इस असमानता के बावजूद, भारत ने दशकों तक ईमानदारी से संधि का पालन किया, जिससे उसके अपने कई क्षेत्रों का विकास प्रभावित हुआ।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं में हमेशा रुकावटें डालीं और नौकरशाही के जरिए देरी की। यहां तक कि भारतीय प्रोजेक्ट साइट्स पर आतंकी हमले भी हुए, जैसे 2012 में तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट पर हुआ हमला। इन कारणों से भारत संधि के तहत मिले अपने अधिकारों का भी पूरा इस्तेमाल नहीं कर सका।
बातचीत और पाकिस्तान की ज़िम्मेदारी
बातचीत की संभावना पर राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रुख दोहराया: "'आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।'"
क्वात्रा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में पानी की कमी का कारण भारत नहीं, बल्कि उसकी अपनी सरकार का कुप्रबंधन है। उन्होंने कहा, "यह याद रखना जरूरी है कि संधि की प्रस्तावना में कहा गया है कि यह 'सद्भावना और मित्रता की भावना से' की गई थी। पाकिस्तान ने आधे सदी में उस सद्भावना और मित्रता को खत्म कर दिया।"
अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर पाकिस्तान वास्तव में द्विपक्षीय मामलों पर भारत का साथ चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपने बनाए हुए आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा।
इनपुट: IANS



