गुरूवार, 30 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान: अदालत ने 13 साल की ईसाई लड़की को उसके कथित अपहरणकर्ता को सौंपा, मानवाधिकार कार्यकर्ता हैरान

पाकिस्तान की एक अदालत ने 13 वर्षीय ईसाई लड़की की कस्टडी उसी व्यक्ति को सौंप दी है, जिस पर लड़की के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी का आरोप है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार…

पाकिस्तान: अदालत ने 13 साल की ईसाई लड़की को उसके कथित अपहरणकर्ता को सौंपा, मानवाधिकार कार्यकर्ता हैरान
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान की एक अदालत ने 13 वर्षीय ईसाई लड़की की कस्टडी उसी व्यक्ति को सौंप दी है, जिस पर लड़की के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी का आरोप है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस फैसले को चौंकाने वाला बताया है, खासकर इसलिए क्योंकि लड़की की उम्र तय करने के लिए मेडिकल जांच अभी बाकी थी।

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फैसलाबाद के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज राणा सोहेल ने नाबालिग अंबर नदीम द्वारा दिए गए एक हलफनामे को आधार बनाया। इस हलफनामे में लड़की ने कहा था कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया और आरोपी मोहसिन लियाकत से शादी की। उसने यह भी दावा किया कि उसका अपहरण नहीं हुआ था। इसी बयान के आधार पर जज ने आरोपी लियाकत को गिरफ्तारी के बाद जमानत भी दे दी।

मामले में विसंगतियां और सवाल

'वॉयस फॉर जस्टिस' संगठन के चेयरमैन जोसेफ जॉनसेन के अनुसार, यह फैसला गंभीर विसंगतियों के बावजूद आया है। उन्होंने बताया कि आरोपी ने धर्म परिवर्तन और शादी का जो सर्टिफिकेट पेश किया, उसमें अंबर की जन्मतिथि जून 2008 बताई गई थी। यह दस्तावेज़ संदिग्ध है क्योंकि अंबर के माता-पिता की शादी ही 2012 में हुई थी।

जॉनसेन ने यह भी बताया कि इससे पहले 27 जून को अंबर एक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुई थी और कहा था कि आरोपी के परिवार ने उस पर झूठ बोलने का दबाव डाला था कि वह बालिग है। इन विसंगतियों को देखते हुए ही मजिस्ट्रेट ने लड़की की उम्र की पुष्टि के लिए मेडिकल जांच का आदेश दिया था और जांच पूरी होने तक उसे सरकारी शेल्टर होम में रखने का निर्देश दिया था। 'क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉनसेन ने मेडिकल जांच से पहले ही कस्टडी सौंपने और आरोपी को जमानत देने के सेशंस कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता

यह घटना पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की नाबालिग लड़कियों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है। इसी महीने यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान में नाबालिग अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह की निंदा की थी। प्रस्ताव में 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शाहबाज के मामले का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था, जिसे मार्च 2026 में अगवा कर जबरन शादी कर ली गई थी।

यूरोपीय संसद ने 2025 के संयुक्त राष्ट्र (UN) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान में शादी के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन का शिकार होने वाली महिलाओं और लड़कियों में लगभग 75 प्रतिशत हिंदू और 25 प्रतिशत ईसाई थीं। संसद ने पाकिस्तानी अधिकारियों से बाल विवाह को खत्म करने और पीड़ितों के परिवारों की शिकायतों को सुनने के लिए एक राष्ट्रीय तंत्र बनाने का आग्रह किया है।

इनपुट: IANS

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