गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान: बलूचिस्तान में भारी नुकसान के बाद सेना में जवानों की कमी, सेवानिवृत्त सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश

पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में सेना गंभीर जनबल संकट से जूझ रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अलगाववादी गुटों के लगातार हमलों में हो रहे भारी नुकसान और…

पाकिस्तान: बलूचिस्तान में भारी नुकसान के बाद सेना में जवानों की कमी, सेवानिवृत्त सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में सेना गंभीर जनबल संकट से जूझ रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अलगाववादी गुटों के लगातार हमलों में हो रहे भारी नुकसान और सैनिकों के नौकरी छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। इस कमी को दूर करने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठान ने सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों को तत्काल प्रभाव से दोबारा भर्ती होने का निर्देश जारी किया है।

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फ्रंटियर कॉर्प्स, बलूचिस्तान (उत्तर) के इंस्पेक्टर जनरल ने एक आधिकारिक संदेश जारी कर रिटायर्ड सैनिकों से तुरंत रिपोर्ट करने के लिए कहा है। इस संदेश में वापसी के लिए 30 अक्टूबर की समय-सीमा तय की गई है, हालांकि इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है। वापस आने वाले सैनिकों को उनकी पिछली सेवा के आधार पर ही वेतन दिया जाएगा और उनके लिए कोई ऊपरी आयु सीमा भी निर्धारित नहीं की गई है।

बढ़ते हमले और जनहानि

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम पाकिस्तानी सेना को हुए भारी नुकसान की ओर इशारा करता है। अकेले सितंबर महीने में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे गुटों ने सुरक्षा बलों पर 94 हमले किए। BLA ने दावा किया कि इन हमलों में 105 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। एक अधिकारी के अनुसार, "इससे पता चलता है कि सिस्टम को भारी नुकसान हुआ है, जिसके कारण उनके सैनिकों की संख्या कम हो गई है।"

इन हमलों में BLA ने विशेष रूप से चेकपोस्टों और सैन्य काफिलों को निशाना बनाया है, जिससे सुरक्षा बलों को काफी क्षति पहुंची है। BLA और BLF ने मस्तुंग, नुश्की, खान, टेक, वाशुक और पंजूर जैसे इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुँचाया है, जो BLA के गढ़ माने जाते हैं।

मनोबल में गिरावट और स्थानीय समर्थन

हमलों में हो रही जनहानि के अलावा सैनिकों के नौकरी छोड़ने की बढ़ती संख्या भी इस संकट का एक बड़ा कारण है। एक अधिकारी ने बताया कि कई सैनिक मारे जाने के डर से या तो नौकरी छोड़ चुके हैं या लापता हो गए हैं। उन्होंने कहा, "उनका मनोबल गिरा हुआ है और वे अब लड़ना नहीं चाहते, इसलिए वे नौकरी छोड़ रहे हैं।"

कई इलाकों में BLA, BLF और TTP का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि उनका पूरा नियंत्रण है। उन्हें स्थानीय लोगों से भी समर्थन मिल रहा है, जिससे उनकी खुफिया जानकारी मजबूत हुई है। इसके विपरीत, स्थानीय लोग सुरक्षा बलों को जानकारी नहीं दे रहे हैं, जो हताहतों की संख्या बढ़ने का एक और कारण है।

ऑपरेशन तेज करने की तैयारी?

एक अधिकारी ने कहा कि रिटायर्ड सैनिकों को वापस बुलाने का एक कारण यह भी हो सकता है कि पाकिस्तानी सेना इन इलाकों में अपने ऑपरेशन तेज करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि BLA और BLF जैसे गुटों ने अपनी क्षमताएं काफी बढ़ा ली हैं और महिला सुसाइड यूनिट भी बनाई हैं, जिन्होंने सफल हमले किए हैं। अनुभवी होने के कारण सेवानिवृत्त जवानों को किसी विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती और वे तुरंत ऑपरेशन में शामिल हो सकते हैं। हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने रिटायर्ड सैनिकों को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के साथ मिलकर लड़ने के लिए भी इस्तेमाल किया है।

इनपुट: IANS

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