गुजरात: हिंसा पीड़ित महिलाओं का सहारा 'सखी वन स्टॉप सेंटर', 5 साल में 53,000 से ज़्यादा को मदद
गुजरात में हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए 'सखी वन स्टॉप सेंटर' एक महत्वपूर्ण सहारे के रूप में उभरे हैं। समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2017 से लेकर इस साल सितंबर तक इन केंद्रों…
गुजरात में हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए 'सखी वन स्टॉप सेंटर' एक महत्वपूर्ण सहारे के रूप में उभरे हैं। समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2017 से लेकर इस साल सितंबर तक इन केंद्रों के माध्यम से 53,851 महिलाओं को अलग-अलग तरह की सहायता पहुंचाई गई है। इस पहल का उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा का सामना कर रही महिलाओं और किशोरियों को एक ही छत के नीचे सभी जरूरी मदद उपलब्ध कराना है।
इन केंद्रों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पीड़ित महिलाओं को मदद के लिए कई दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। उन्हें एक ही जगह पर अस्थायी आश्रय, चिकित्सा उपचार, कानूनी सलाह और पुलिस सहायता जैसी सभी सुविधाएं मिल जाती हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो मदद पाने वाली 53,851 महिलाओं में से सबसे ज्यादा 29,351 को आश्रय मुहैया कराया गया।
एक छत के नीचे मिलती है हर मदद
राज्य के 34 जिलों में कुल 36 'सखी वन स्टॉप सेंटर' चलाए जा रहे हैं, जो चौबीसों घंटे काम करते हैं। इन केंद्रों द्वारा दी गई अन्य प्रमुख सहायताओं में 8,527 महिलाओं को चिकित्सा सहायता, 7,617 को कानूनी मदद और 4,706 को पुलिस सहायता प्रदान करना शामिल है। अधिकारियों के मुताबिक, इन केंद्रों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आपातकालीन बचाव सेवाओं की सुविधा भी मौजूद है।
क्या है यह योजना?
सखी वन स्टॉप सेंटर योजना की शुरुआत केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने अगस्त 2016 में की थी। इसका लक्ष्य घर, दफ्तर या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर हिंसा की शिकार महिलाओं को तत्काल और एकीकृत सहायता देना है। गुजरात में इस योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार का महिला एवं बाल विकास विभाग कर रहा है। ये केंद्र महिलाओं की व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से उन्हें तत्काल सुरक्षा और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।
इनपुट: IANS



