भारत में सेमीकंडक्टर क्रांति: 1 लाख से ज़्यादा इंजीनियर चिपइन सेंटर से जुड़े, 300 चिप डिजाइन तैयार
भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को एक बड़ी सफलता मिली है, क्योंकि देश के 1 लाख से अधिक इंजीनियर चिपइन सेंटर के प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह उपलब्धि सरकार के 'चिप्स टू…
भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को एक बड़ी सफलता मिली है, क्योंकि देश के 1 लाख से अधिक इंजीनियर चिपइन सेंटर के प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह उपलब्धि सरकार के 'चिप्स टू स्टार्टअप' (C2S) कार्यक्रम और 'डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव' (DLI) योजना के तहत हासिल हुई है। इस पहल का सीधा मकसद देश में चिप डिजाइन की क्षमता को मजबूत करना और इस क्षेत्र के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार करना है।
इन योजनाओं से जुड़े इंजीनियर 500 से अधिक संगठनों से आते हैं, जिनमें 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि इन सभी को उन्नत चिप डिजाइन उपकरण, चिप बनाने (फेब्रिकेशन) की सेवाएं और विशेष प्रशिक्षण की सुविधा दी जा रही है।
इस पहल के ठोस परिणाम
इस कार्यक्रम का असर जमीन पर भी दिखने लगा है। अब तक इन संस्थानों और स्टार्टअप्स ने मिलकर 300 से अधिक चिप डिजाइन विकसित किए हैं, जिन्हें भारत और विदेशों में निर्माण के लिए भेजा जा चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, इन इंजीनियरों द्वारा चिप डिजाइन टूल्स का 4 करोड़ घंटे से भी ज़्यादा इस्तेमाल किया गया है। सरकार का कहना है कि इस व्यापक भागीदारी के चलते चिपइन सेंटर दुनिया के सबसे बड़े केंद्रीकृत चिप डिजाइन उपयोगकर्ता समूहों में से एक बन गया है, जो भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
सरकार की दोहरी रणनीति
सरकार दो प्रमुख योजनाओं के जरिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है। चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम मुख्य रूप से छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स में सेमीकंडक्टर डिजाइन कौशल विकसित करने पर केंद्रित है। वहीं, डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना घरेलू चिप डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देती है। इसके तहत वीडियो सर्विलांस, ड्रोन डिटेक्शन, एनर्जी मीटर, माइक्रोप्रोसेसर और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चिप डिजाइन को बढ़ावा मिला है।
सेमीकॉन इंडिया: भविष्य की ओर बढ़ते कदम
सरकार ने बताया कि सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत अब तक 6 राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें से तीन इकाइयां अपना व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर चुकी हैं। सरकार के मुताबिक, यह दर्शाता है कि भारत अब सिर्फ योजनाएं नहीं बना रहा, बल्कि डिजाइन, निर्माण और पैकेजिंग में वास्तविक क्षमताएं भी विकसित कर रहा है।
इनपुट: IANS



