गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में गर्भवती महिलाओं की सेहत पर चिंता, 'उच्च जोखिम' वाली सिर्फ़ 30% को ही समय पर मिल रहा अस्पताल

मध्य प्रदेश में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य में पहचानी गई 'उच्च जोखिम' (high-risk) वाली गर्भवती महिलाओं में से केवल 30 प्रतिशत को ही समय पर अस्पतालों…

मध्य प्रदेश में गर्भवती महिलाओं की सेहत पर चिंता, 'उच्च जोखिम' वाली सिर्फ़ 30% को ही समय पर मिल रहा अस्पताल
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य में पहचानी गई 'उच्च जोखिम' (high-risk) वाली गर्भवती महिलाओं में से केवल 30 प्रतिशत को ही समय पर अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। यह तथ्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा बैठक में सामने आया, जिसके बाद उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने अधिकारियों को इस मामले में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

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समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, प्रदेश के स्वास्थ्य निगरानी पोर्टल 'अनमोल' पर करीब 62 लाख गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया है। इनमें से लगभग 2 लाख महिलाओं की गर्भावस्था को उच्च जोखिम वाला पाया गया है। इन मामलों की निगरानी सुमन एकीकृत कमांड सेंटर के माध्यम से भी की जाती है, लेकिन इसके बावजूद समय पर अस्पताल में भर्ती होने का आंकड़ा बेहद कम है।

स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और निर्देश

समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, जिनके पास स्वास्थ्य मंत्रालय का भी प्रभार है, ने अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करने और सभी निर्धारित प्रसवपूर्व जांचों को पूरा करवाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्क्रीनिंग को गंभीरता से लिया जाए और संस्थागत प्रसव के लिए जागरूकता बढ़ाई जाए। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों से लेकर जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तक की जिम्मेदारियां तय होनी चाहिए और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित निगरानी की जानी चाहिए।

राज्य में मातृ स्वास्थ्य के आंकड़े

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (2022-24) के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 135 है। चालू वित्त वर्ष में सितंबर तक के आंकड़ों को देखें तो गर्भवती महिलाओं का पहली तिमाही में पंजीकरण 90.6 प्रतिशत और संस्थागत प्रसव 93.4 प्रतिशत रहा है। प्रदेश में गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए 35 प्रसूति गहन देखभाल इकाइयां (Obstetric ICUs), 109 प्राथमिक रेफरल इकाइयां और 229 प्रसव प्रतीक्षा गृह मौजूद हैं।

टेलीमेडिसिन और बाल स्वास्थ्य पर भी जोर

उपमुख्यमंत्री शुक्ला ने ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन सेवा 'ई-संजीवनी' को और बेहतर बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने सेवा में मौजूद कमियों को दूर करने और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच ई-संजीवनी के माध्यम से राज्य में 59,914 सामान्य टेली-परामर्श और 10,890 विशेषज्ञ परामर्श दिए गए। इसके अलावा, उन्होंने नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए इलाज की सुविधाओं को मजबूत करने तथा कुपोषण, एनीमिया, दस्त और निमोनिया से निपटने के कार्यक्रमों में सुधार करने का भी आह्वान किया।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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