भारत की आतंक-विरोधी रणनीति जंग में परखी हुई, ADMM-प्लस देशों से अनुभव साझा करने को तैयार: राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को वास्तविक और युद्ध में परखी हुई बताया है। उन्होंने कहा कि भारत अपने इस व्यावहारिक अनुभव को आसियान (ADMM-प्लस) साझेदार देशों के साथ साझा…
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को वास्तविक और युद्ध में परखी हुई बताया है। उन्होंने कहा कि भारत अपने इस व्यावहारिक अनुभव को आसियान (ADMM-प्लस) साझेदार देशों के साथ साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिलीपींस के सेबू में 'आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक' को संबोधित करते हुए उन्होंने पिछले साल के 'ऑपरेशन सिंदूर' का उदाहरण दिया, जिसमें बड़ी संख्या में आतंकवादी ढाँचों को नष्ट किया गया था।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राजनाथ सिंह ने इस ऑपरेशन को राज्य-प्रायोजित आतंक के खिलाफ भारत के स्पष्ट दृष्टिकोण की घोषणा बताया। उन्होंने कहा, "आतंकवाद-निरोध के क्षेत्र में भारत का अनुभव, कक्षा या सैद्धांतिक ज्ञान भर नहीं है बल्कि यह दशकों तक जमीनी स्तर पर सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने का अनुभव हासिल हुआ है।" रक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास और खुफिया जानकारी साझा करने से सामूहिक क्षमताओं को और मजबूत किया जा सकता है।
समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र
रक्षा मंत्री ने एक खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भारत की परिकल्पना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास रखता है जो आपसी विश्वास, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी पर आधारित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हिंद महासागर और व्यापक इंडो-पैसिफिक में एक विश्वसनीय सुरक्षा प्रदाता के रूप में काम करता रहेगा।
समुद्री सुरक्षा पर भारत की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 2008 से भारतीय नौसेना अदन की खाड़ी जैसे अस्थिर समुद्री गलियारे में लगातार सक्रिय है। इस दौरान नौसेना ने हजारों व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा दी और अपहरण की कई कोशिशों को नाकाम किया।
युवाओं को जोड़ने पर जोर
राजनाथ सिंह ने भारत और आसियान के बीच एक मजबूत 'यूथ ब्रिज' स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य लोगों के बीच संपर्क, डिजिटल नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि भारत और आसियान देशों की सबसे बड़ी ताकत उनकी युवा आबादी, ऊर्जा और आकांक्षाएं हैं। यह समानता एक विशेष बढ़त देती है और दोनों के भविष्य को एक-दूसरे से जोड़ती है।
इनपुट: IANS



