कावेरी डेल्टा में किसानों की चिंता बढ़ी, मेट्टूर से छोड़ा गया पानी ऊपरी एनीकट तक तो पहुँचा पर प्रवाह बेहद कम
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की सिंचाई संबंधी चिंताएँ और गहरी हो गई हैं। मेट्टूर बाँध से छोड़ा गया पानी तिरुची जिले के मुक्कोंबू स्थित ऊपरी एनीकट (अपर एनीकट) तक तो पहुँच गया है, लेकिन…
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की सिंचाई संबंधी चिंताएँ और गहरी हो गई हैं। मेट्टूर बाँध से छोड़ा गया पानी तिरुची जिले के मुक्कोंबू स्थित ऊपरी एनीकट (अपर एनीकट) तक तो पहुँच गया है, लेकिन उसका प्रवाह इतना कम है कि इससे सिंचाई की ज़रूरतें पूरी होने की उम्मीद कम ही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर 1 सितंबर को मेट्टूर जलाशय से 7,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, लेकिन शुक्रवार सुबह जब यह ऊपरी एनीकट पहुँचा, तो प्रवाह घटकर महज़ 1,500 क्यूसेक रह गया।
पहले से ही जलाशय में कम पानी के कारण इस साल पानी छोड़ने में देरी हुई थी, जिसका असर कावेरी डेल्टा के कुछ हिस्सों में कुरुवाई की खेती पर पड़ा। जब बाँध का जलस्तर 92 फीट तक पहुँचा और पानी का प्रवाह 8,456 क्यूसेक हुआ, तब जाकर यह पानी छोड़ा जा सका था।
पानी के प्रवाह में लगातार गिरावट
मेट्टूर से छोड़ा गया पानी गुरुवार को करूर जिले के मयानूर बैराज तक पहुँचा था। वहाँ शुरुआत में प्रवाह 2,737 क्यूसेक था, जो बाद में बढ़कर 4,081 क्यूसेक हो गया। इसके बाद मयानूर से ऊपरी एनीकट के लिए लगभग 2,050 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। लेकिन शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे जब यह पानी मुक्कोंबू पहुँचा, तो इसकी मात्रा घटकर 1,500 क्यूसेक ही रह गई थी। अधिकारियों ने बताया कि बाँध पर पहले से मौजूद 777 क्यूसेक पानी का इस्तेमाल पेयजल के लिए किया जा रहा था।
सिंचाई के लिए अपर्याप्त
अधिकारियों ने प्रवाह में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद में उपलब्ध 1,500 क्यूसेक पानी को कावेरी नदी में ग्रैंड एनीकट (कल्लनई) की ओर छोड़ दिया है। इसके शनिवार तक कल्लनई पहुँचने की संभावना है, जिसके बाद रविवार से सिंचाई प्रणालियों में पानी छोड़ा जा सकता है। हालाँकि, सिंचाई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डेल्टा क्षेत्र में प्रभावी सिंचाई के लिए 16,000 क्यूसेक से अधिक पानी की आवश्यकता होती है। उनके अनुसार, मौजूदा प्रवाह से पानी मुख्य नदी तक ही सीमित रह सकता है और खेतों तक पानी पहुँचाने वाली शाखा नहरों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँच पाएगा, जिससे फसल का इंतज़ार कर रहे किसानों को कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
इनपुट: IANS



