गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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उत्तर कोरिया ने मेडिकल मदद की पेशकश ठुकराई, दक्षिण कोरिया पर 'राजनीतिक उकसावे' का आरोप लगाया

उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया है, जब प्योंगयांग ने सोल की ओर से दी जाने वाली मेडिकल सहायता को एक 'अपमान' और 'राजनीतिक उकसावा' बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। समाचार…

उत्तर कोरिया ने मेडिकल मदद की पेशकश ठुकराई, दक्षिण कोरिया पर 'राजनीतिक उकसावे' का आरोप लगाया
(फोटो: IANS)

उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया है, जब प्योंगयांग ने सोल की ओर से दी जाने वाली मेडिकल सहायता को एक 'अपमान' और 'राजनीतिक उकसावा' बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की प्रभावशाली बहन किम यो-जोंग ने इस पेशकश को एक 'भद्दी हरकत' और 'नाटक' करार दिया है।

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यह विवाद तब शुरू हुआ जब दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने मानवीय सहायता कार्यक्रम के तहत प्योंगयांग के एक अस्पताल को मेडिकल उपकरण भेजने की योजना की घोषणा की। इस योजना में जांच, सर्जरी और इलाज के लिए आवश्यक 166 श्रेणियों की कुल 1,431 वस्तुएं शामिल थीं। मंत्रालय ने इस खेप के लिए मई में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति से विशेष छूट भी हासिल कर ली थी।

सहायता पर तल्ख बयानबाजी

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए द्वारा जारी एक बयान में किम यो-जोंग ने दक्षिण कोरिया के इस कदम की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "यह हमारे देश का अपमान है, हमारे खिलाफ राजनीतिक मकसद से किया गया उकसावा है और हमारे राष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।"

किम यो-जोंग ने इस पेशकश की तुलना 21 सितंबर को हुए एक बारूदी सुरंग विस्फोट से की, जिसमें तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए थे। उन्होंने कहा, "अब जब उनके घटिया नाटक से अच्छे बॉक्स-ऑफिस रिकॉर्ड की उम्मीद करना नामुमकिन है, तो उन्होंने 'मेडिकल उपकरण की मदद का सीन' नाम से एक और नाटक रचा है, जो 'बारूदी सुरंग विस्फोट मामले' का दूसरा भाग है।"

बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं

बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्योंगयांग का सोल के साथ किसी भी तरह के संवाद या संपर्क का कोई इरादा नहीं है। दक्षिण कोरिया को उसके आधिकारिक नाम 'रिपब्लिक ऑफ कोरिया' (ROK) से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हमारे पास आरओके के साथ आदान-प्रदान या साथ चलने के लिए कुछ भी नहीं है और न ही उसके आमने-सामने आने की कोई जरूरत है।" उन्होंने दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया (DPRK) का 'सबसे बड़ा दुश्मन' बताते हुए संबंधों में सुधार की किसी भी उम्मीद को बेमानी बताया।

इस घटनाक्रम के बाद दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि योजना के अनुसार सामान भेजने की संभावना कम है और सरकार संयुक्त राष्ट्र से इसकी समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध करेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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