शनिवार, 15 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव से थमा शेयर बाजार का विजय रथ, सेंसेक्स-निफ्टी में साप्ताहिक गिरावट

लगातार दो हफ़्तों की तेज़ी के बाद इस सप्ताह भारतीय शेयर बाज़ार पर दबाव देखा गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क…

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव से थमा शेयर बाजार का विजय रथ, सेंसेक्स-निफ्टी में साप्ताहिक गिरावट
(फोटो: IANS)

लगातार दो हफ़्तों की तेज़ी के बाद इस सप्ताह भारतीय शेयर बाज़ार पर दबाव देखा गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सप्ताह के अंत तक निफ्टी में 0.83% और सेंसेक्स में 0.62% की गिरावट दर्ज की गई।

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सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन, शुक्रवार को, सेंसेक्स 70 अंक (0.09%) गिरकर 78,009 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.12% की गिरावट के साथ 24,366 के स्तर पर रहा। बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका के श्रम बाज़ार के कमज़ोर आँकड़ों से उम्मीद जगी थी कि अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व ब्याज दरों पर नरम रुख अपना सकता है, लेकिन कच्चे तेल के उछाल ने महंगाई की चिंताएँ फिर से बढ़ा दीं।

घरेलू मोर्चे पर मिली राहत

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय बाज़ार को कुछ घरेलू कारकों ने बड़े नुक़सान से बचाया। कंपनियों के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये में स्थिरता, 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की धीरे-धीरे बढ़ती भागीदारी ने बाज़ार को सहारा दिया। निफ्टी-50 की 33 कंपनियों ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र की कमाई की बुनियाद मज़बूत बनी हुई है।

सेक्टर और शेयरों का प्रदर्शन

इस सप्ताह बड़े शेयरों (लार्ज-कैप) पर वैश्विक तनाव का असर दिखा, लेकिन मिडकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया और प्रमुख सूचकांकों को भी पीछे छोड़ दिया। वहीं, अगर सेक्टरों की बात करें तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी में अच्छी खरीदारी देखी गई। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) ने भी अपनी मज़बूत संपत्ति गुणवत्ता और बेहतर क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीदों के कारण अच्छा प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, मेटल, ऑटोमोबाइल और FMCG सेक्टर के शेयरों में मुनाफ़ावसूली का दौर रहा।

आगे किन बातों पर रहेगी नज़र

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में बाज़ार की दिशा तय करने में कई वैश्विक कारक अहम भूमिका निभाएंगे। इनमें कच्चे तेल की क़ीमतें, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, अमेरिका के खुदरा बिक्री के आँकड़े, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक का ब्योरा और चीन से आने वाले आर्थिक आँकड़े शामिल हैं। इन्हीं से वैश्विक आर्थिक वृद्धि और अमेरिकी ब्याज दरों की भविष्य की दिशा का संकेत मिलेगा, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाज़ार पर भी पड़ेगा।

इनपुट: IANS

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