शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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गिफ्ट सिटी के विदेशी बॉन्ड अब भारतीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी मिलेंगे, सेबी ने दी मंजूरी

निवेशकों के लिए बॉन्ड बाजार में पैसा लगाने के अवसर अब और बढ़ने वाले हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (OBPPs) का दायरा बढ़ाते हुए उन्हें गिफ्ट सिटी…

गिफ्ट सिटी के विदेशी बॉन्ड अब भारतीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी मिलेंगे, सेबी ने दी मंजूरी
(फोटो: IANS)

निवेशकों के लिए बॉन्ड बाजार में पैसा लगाने के अवसर अब और बढ़ने वाले हैं। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (OBPPs) का दायरा बढ़ाते हुए उन्हें गिफ्ट सिटी के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय उत्पादों को भी अपने प्लेटफॉर्म पर पेश करने की अनुमति दे दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस कदम का मुख्य उद्देश्य कारोबार करने में आसानी लाना और निवेशकों के लिए उपलब्ध विकल्पों को बढ़ाना है।

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शुक्रवार को जारी किए गए नए नियमों के अनुसार, ये ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब न केवल सेबी द्वारा विनियमित उत्पाद, बल्कि गिफ्ट सिटी में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) द्वारा नियंत्रित प्रतिभूतियां और निवेश उत्पाद भी बेच सकेंगे।

अब एक ही जगह मिलेंगे कई तरह के उत्पाद

इस फैसले के बाद ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म एक तरह के 'सुपरमार्केट' बन जाएँगे, जहाँ विभिन्न वित्तीय नियामकों के उत्पाद एक साथ उपलब्ध होंगे। इनमें सेबी के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), बीमा नियामक इरडा (IRDAI) और पेंशन नियामक PFRDA द्वारा विनियमित उत्पाद भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सेबी ने आयकर अधिनियम के तहत जारी कुछ विशेष कर-बचत बॉन्ड (धारा 54EC और 85 के तहत) को भी इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए पेश करने की मंजूरी दी है।

निवेशकों के लिए नियम और सुरक्षा

सेबी ने निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए कुछ शर्तें भी लगाई हैं। गिफ्ट सिटी (IFSCA) के उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट रूप से 'अंतरराष्ट्रीय' या 'विदेशी निवेश' के रूप में चिन्हित करना अनिवार्य होगा, ताकि घरेलू और विदेशी उत्पादों को लेकर कोई भ्रम न हो।

इन अंतरराष्ट्रीय उत्पादों की पेशकश करते समय विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के नियमों का भी सख्ती से पालन करना होगा, जिसमें विदेशी निवेश और लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत तय सीमाएं शामिल हैं। नियामक ने यह भी कहा है कि इन उत्पादों से जुड़ी शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया के बारे में निवेशकों को स्पष्ट जानकारी देनी होगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

इनपुट: IANS

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