शनिवार, 11 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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शेयर बाजार: चार हफ्तों की तेजी पर लगा ब्रेक, पश्चिम एशिया के तनाव ने डाला दबाव

लगातार चार हफ्तों से भारतीय शेयर बाजार में जारी तेजी का सिलसिला इस हफ्ते थम गया। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा, जिसके चल

शेयर बाजार: चार हफ्तों की तेजी पर लगा ब्रेक, पश्चिम एशिया के तनाव ने डाला दबाव
(फोटो: IANS)

लगातार चार हफ्तों से भारतीय शेयर बाजार में जारी तेजी का सिलसिला इस हफ्ते थम गया। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद हुए।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस सप्ताह सेंसेक्स 0.25% और निफ्टी 0.26% कमजोर रहा। हालांकि, हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को बाजार में अच्छी रिकवरी देखी गई, जब सेंसेक्स 827 अंक (1.08%) चढ़कर 77,569 पर और निफ्टी 1.02% की तेजी के साथ 24,206 के स्तर पर बंद हुआ।

क्यों उतार-चढ़ाव भरा रहा यह हफ्ता?

सप्ताह की शुरुआत तो सकारात्मक रही, लेकिन बाद में पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों में बिकवाली का माहौल बना दिया, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। हालांकि, हफ्ते के दूसरे हिस्से में स्थिति सुधरी। इसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों का 76 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 71-72 डॉलर के दायरे में आना और वैश्विक टेक शेयरों में सुधार रही।

निवेशकों का भरोसा कैसे लौटा?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए बैंकिंग और आईटी कंपनियों के बेहतर कारोबारी अपडेट आने से निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भी इस हफ्ते खरीदारी में रुचि दिखाई। पूरे सप्ताह के दौरान उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में करीब 4,670 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया और ज्यादातर कारोबारी सत्रों में वे शुद्ध खरीदार (नेट बायर्स) बने रहे।

सेक्टर और शेयरों का हाल

इस सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप-100 में 1.36% और निफ्टी स्मॉलकैप-100 में 1.26% की साप्ताहिक बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल एस्टेट, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी रही, जबकि मीडिया, एफएमसीजी और केमिकल सेक्टर दबाव में कारोबार करते दिखे।

आगे बाजार की दिशा क्या होगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल कंपनियों के तिमाही नतीजों, भारत और अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों से तय होगी। तकनीकी स्तर पर, निफ्टी के लिए 24,300 का स्तर एक प्रमुख बाधा (रेजिस्टेंस) हो सकता है, जबकि 24,100 और 24,000 पर इसे समर्थन (सपोर्ट) मिलने की उम्मीद है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 57,700-57,800 का दायरा अहम सपोर्ट माना जा रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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