बुधवार, 5 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक विज्ञापन: रिपोर्ट में देरी पर NHRC ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को किया तलब

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री वाले विज्ञापनों के मामले में दिल्ली पुलिस के ढीले रवैये पर नाराज़गी जताई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…

इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक विज्ञापन: रिपोर्ट में देरी पर NHRC ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को किया तलब
(फोटो: IANS)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री वाले विज्ञापनों के मामले में दिल्ली पुलिस के ढीले रवैये पर नाराज़गी जताई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बार-बार याद दिलाने के बावजूद एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल न करने पर आयोग ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया है।

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यह पूरा मामला बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की एक खोजी रिपोर्ट के बाद सामने आया था। रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि इंस्टाग्राम पर 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर सशुल्क विज्ञापन चलाए जा रहे थे। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने वाले यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर ले जाया जा रहा था, जहाँ बच्चों की यौन शोषण सामग्री (CSAM) की बिक्री हो रही थी।

रिपोर्ट में देरी और NHRC का कड़ा रुख

इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी ने 8 जुलाई को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस भेजकर 15 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। समय सीमा बीत जाने पर जब कोई जवाब नहीं मिला, तो आयोग ने 29 जुलाई को एक रिमाइंडर भेजा और रिपोर्ट सौंपने के लिए 7 दिन का अतिरिक्त समय दिया।

तय समय में रिपोर्ट फिर भी न मिलने पर बुधवार को एनएचआरसी सदस्य प्रियांक कानूनगो की बेंच ने इसे 'बहुत गंभीर' मामला मानते हुए कमिश्नर को 7 सितंबर को सुबह 11:30 बजे आयोग के समक्ष पेश होने का आदेश दिया। हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 31 अगस्त तक रिपोर्ट जमा कर दी जाती है, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने की आवश्यकता नहीं होगी।

जांच और कानूनी जवाबदेही के निर्देश

एनएचआरसी ने अपने आदेश में कहा कि अगर रिपोर्ट के आरोप सही हैं, तो यह बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण, संगठित अपराध और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। आयोग ने निर्देश दिया है कि इस मामले की जांच पोक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत की जानी चाहिए।

आयोग ने दिल्ली पुलिस से अपेक्षा की है कि वह डिजिटल सबूतों को सुरक्षित करे, पीड़ितों और आरोपियों की पहचान करे, और विज्ञापन के पीछे हुए वित्तीय लेन-देन का पता लगाए। साथ ही यह भी जांचने को कहा है कि क्या मेटा (इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी) ने पोक्सो कानून के तहत अपराध की रिपोर्टिंग की अपनी अनिवार्य जिम्मेदारी निभाई थी।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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